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धामी सरकार का बड़ा फैसला: उत्तराखंड के 45 विश्वविद्यालयों में होगी AI की पढ़ाई, एक लाख स्टूडेंट्स को मिलेगी ट्रेनिंग

By Ashok KediyalEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Wed, 21 Oct 2026 06:43 AM (IST)

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सभी 45 विश्वविद्यालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की पढ़ाई अनिवार्य कर दी है। इसका लक्ष्य ...और पढ़ें

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HighLights

  1. उत्तराखंड के 45 विश्वविद्यालयों में एआई की पढ़ाई अनिवार्य।

  2. प्रतिवर्ष एक लाख युवाओं को एआई में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य।

  3. छात्रों को भविष्य की तकनीक के लिए तैयार किया जाएगा।

अशोक केडियाल, देहरादून। उत्तराखंड में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) के क्षेत्र में दक्ष बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। धामी सरकार ने प्रदेश में प्रतिवर्ष एक लाख युवाओं को एआइ से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने के साथ भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना है। इस लक्ष्य को हासिल करने में प्रदेश के विश्वविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

एआइ का प्रभाव अब शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, अनुसंधान, प्रशासन और दैनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को केवल तकनीकी प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनमें विज्ञानी दृष्टिकोण, आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता विकसित करना भी जरूरी है।

इसी उद्देश्य से उच्च शिक्षा में एआइ के व्यापक उपयोग और अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उच्च शिक्षा मंत्री डा धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य विश्वविद्यालय समेत सभी 45 विश्वविद्यालयों में एआइ की पढ़ाई और प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के 1100 विद्यार्थी एआइ में दक्ष हो चुके हैं।

नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है युवाओं को एआइ से जोड़ने का लक्ष्य

दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि एआइ के बदलते दौर में विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, वैज्ञानिक चिंतन और मौलिक अनुसंधान के लिए प्रेरित करना होगा। उन्हें समाज की वास्तविक समस्याओं के प्रभावी समाधान तैयार करने में सक्षम बनाना भी जरूरी है। प्रतिवर्ष एक लाख युवाओं को एआइ से जोड़ने का लक्ष्य नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।

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सुप्रसिद्ध कंप्यूटर विज्ञानी एवं इंडियन एआइ रिसर्च आर्गेनाइजेशन के संस्थापक निदेशक और सीईओ प्रो. अमित सेठ के अनुसार, एआइ अब केवल कंप्यूटर विज्ञान तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव जीवन के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। उन्होंने उत्तराखंड में एआइ के भविष्य को उज्ज्वल बताया।