उत्तराखंड-यूपी का अटूट ऊर्जा संबंध: 26 साल बाद भी कायम बिजली का रिश्ता, इस तरह एक दूसरे की मदद कर रहे दोनों राज्य
उत्तराखंड के अलग होने के 26 साल बाद भी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच बिजली और जल संसाधनों का ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई से बनाई गई है

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अश्वनी त्रिपाठी, जागरण, देहरादून। सरहदें जमीन बांट सकती हैं, नक्शे बदल सकती हैं, राजधानियां और सियासत के रास्ते अलग कर सकती हैं, लेकिन क्या वे उन रिश्तों को भी बांट सकती हैं, जिन्हें वक्त ने दशकों तक सींचा हो?
नौ नवंबर, 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड ने अपने स्वतंत्र राज्य का सफर शुरू किया तो पहाड़ और मैदान के बीच एक नई प्रशासनिक लकीर खिंच गई। मगर कुछ रिश्ते ऐसे थे, जो न उस दिन टूटे और न कमजोर पड़े। दोनों राज्यों के बीच बिजली के तारों में दौड़ती ऊर्जा का रिश्ता भी ऐसा ही है।
उत्तराखंड की बिजली से यूपी में उजाला
इस रिश्ते की सुखद तस्वीर टिहरी और कोटेश्वर जलविद्युत परियोजनाओं में दिखाई देती है। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की 1000 मेगावाट की टिहरी परियोजना से उत्तर प्रदेश को 374 मेगावाट व 400 मेगावाट की कोटेश्वर परियोजना से 155.04 मेगावाट बिजली आवंटित है। तस्वीर साफ है, उत्तराखंड में स्थित इन दोनों परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश को कुल 529.04 मेगावाट बिजली मिलती है।
मैदान की ऊर्जा से पहाड़ को सहारा
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर स्थित टीएचडीसी की 1320 मेगावाट खुर्जा तापीय परियोजना से उत्तराखंड को 51.8 मेगावाट बिजली आवंटित है। जलविद्युत उत्पादन में मौसमी उतार-चढ़ाव के बीच तापीय बिजली उत्तराखंड की आपूर्ति व्यवस्था को सहारा देती है।
यूपी-उत्तराखंड को जोड़ने वाली प्रमुख परियोजनाएं
ढुकवां जलविद्युत परियोजना (24 मेगावाट): झांसी में बेतवा नदी पर स्थित टीएचडीसी की इस परियोजना से उत्पादित पूरी बिजली उत्तर प्रदेश को मिलती है।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना: टोंस नदी पर प्रस्तावित साझा परियोजना से उत्तर प्रदेश को सिंचाई के लिए लगभग 411 मिलियन घनमीटर पानी मिलेगा।
टिहरी बांध: यूपी को प्रतिदिन 200 क्यूसेक पेयजल देता है, जिससे करीब 30 लाख लोगों को लाभ मिलता है, वहीं गंगा के मैदानी क्षेत्र में 2.70 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलता है।
‘उप्र और उत्तराखंड के बीच बिजली उत्पादन के रिश्ते भरोसेमंद हैं। विद्युत परियोजनाओं से उत्पादित बिजली के आवंटन और साझा जल संसाधनों के बेहतर उपयोग से दोनों राज्यों को लाभ मिलता है।’
एके सिंह, एमडी, उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड
यह भी पढ़ें- देहरादून में कांग्रेस की न्याय यात्रा: कैंट और धर्मपुर विधानसभा में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और महंगाई पर सरकार को घेरा
यह भी पढ़ें- देहरादून के बालावाला में आइटी पार्क से हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार, धामी सरकार ने केंद्र को भेजा प्रस्ताव
