जागरण संवाददाता, ऋषिकेश :

परमार्थ निकेतन में समाजिक जिम्मेदारी के तहत दिव्य कथाओं के मंच से पर्यावरण के प्रति लोगों को जागृत करने के लिए अभियान चलाने पर विशेष चर्चा की गई। जिसमें

विश्व जागृति मंच के सुधांशु महाराज, प्रसिद्ध श्रीराम कथाकार संत मुरलीधर महाराज ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज के साथ बैठक की।

बुधवार को परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानंद सरस्वती ने दोनों संतों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कथाकार सामाजिक जिम्मेदारियों के तहत पराली से प्रदूषण नहीं बल्कि एग्री बोर्ड के माध्यम से प्रत्येक परिवार का अपना घर हो सपना साकार करना, पी लो पानी, हैंडवाशिग, जियो ट्यूब तकनीक जैसी अनेक तकनीक का उपयोग कर हम अपनी नदियों और पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं। उन्होंने पराली जलाने से बढ़ते वायु प्रदूषण पर चिता व्यक्त करते हुए पराली से ईको फ्रेंडली घर बनाने, जियो ट्यूब तकनीक को गंगा व ऋषिकेश के चन्द्रभागा नाले के जल को स्वच्छ जल में परिवर्तित करने के लिए लगाई गई है। स्वामी ने कहा कि कि गंगा व यमुना में गिरने वाले नाले चाहे वह कहीं के भी हों उन सभी का समाधान निकाला जा सकता है। सभी को स्वच्छ जल उपलब्ध होता रहे, इसके लिए जल को स्वच्छ और पीने योग्य करने वाली पी लो पानी हैंडवाशिग स्टेशन को धार्मिक और ऐतिहासिक स्थानों पर लगाने के बारे पर चर्चा की। इस दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, सुधांशु महाराज व संत मुरलीधर महाराज ने विश्व शान्ति और शुद्ध जल की आपूर्ति के लिए की वाटॅर ब्लेसिग सेरेमनी कर स्वच्छ, सुन्दर और समृद्ध विश्व के निर्माण के लिए प्रार्थना की। साथ ही दोनों संतों को परमार्थ निकेतन विदाई दी गई।

Posted By: Jagran

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