राज्य ब्यूरो, देहरादून: देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र में उद्योगों को नोटिस दिए जाने के मसले को सरकार ने गंभीरता से लिया है। उद्योग मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उद्योगों का कोई अहित नहीं होने दिया जाएगा। सरकार इस मामले का सकारात्मक हल निकालेगी। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी, देहरादून से इस संबंध में जानकारी लेकर उचित कार्यवाही की जाएगी।

उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद सरकार ने उद्योगों की स्थापना के लिए कई जगह जमीन आवंटित की थी। इनमें सेलाकुई में स्थित पट्टे की जमीन भी शामिल है। राज्य सरकार ने कुछ समय बाद उद्योगों की सहूलियत के लिए यह जमीन फ्रीहोल्ड कर दी। इसके लिए बाकायदा जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। इस बीच हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एक्ट की धारा 132 ए के अंतर्गत आने वाली जमीनों का भू आवंटन निरस्त करने के निर्देश दिए। जो जमीनें उद्योगों को दी गई थी, वे इसी के अंतर्गत आ रही है। कोर्ट के निर्णय के क्रम में अक्टूबर 2019 में विकास नगर प्रशासन ने उद्योगों को नोटिस जारी कर दिए। इससे उद्यमियों में हड़कंप मच गया। उन्होंने इस संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा, जिस पर तत्कालीन सरकार ने उद्यमियों को उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।

गत मार्च में नेतृत्व परिवर्तन के बाद उद्यमियों ने उद्योग मंत्री गणेश जोशी के सामने यह मसला उठाया। उन्होंने कहा कि ने सरकार के निर्देशों के अनुसार ही यहां उद्योग स्थापित किए गए। इन उद्योगों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिला। ऐसे में इन उद्योगों को कैसे हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान निकाला जाए।उद्योग मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी, देहरादून से वार्ता की गई है। सरकार उद्योगों का अहित नहीं होने देगी। इस मसले का हल निकाला जाएगा।

कालसी में भी 11 उद्योगों को नोटिस

कालसी औद्योगिक क्षेत्र में भी स्थानीय प्रशासन ने 11 उद्योगों को जमीन सरकार में निहित करने के आदेश दिए हैं। इसका भी औद्योगिक संगठनों ने विरोध किया है। दरअसल, औद्योगिक क्षेत्र कालसी में 11 उद्योग लगाए गए हैं। इन इकाइयों ने यहां 10 से 15 वर्ष के लिए जमीन लीज किराये पर ली है, जिसकी लीज डीड को स्टांप ड्यूटी अदा करते हुए रजिस्टर्ड कराया गया है। इस बीच यहां जौनसार बावर क्षेत्र के बाहर के व्यक्तियों को लीज डीड देने के मसले पर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई। अब हाईकोर्ट के निर्देशों के क्रम में उप जिलाधिकारी ने चकराता ने इसी माह 14 जुलाई को लीज डीड को नियमों के विपरीत बताते हुए इस भूमि को सरकार में निहित कर दिया।

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Edited By: Sumit Kumar