Uttarakhand Flood: सामने आई तमक में तबाही की वजह; सिर्फ बारिश नहीं, वहां के पहाड़ भी जिम्मेदार
Tamak Flood Uttarakhand: दून विश्वविद्यालय के अध्ययन के अनुसार, 10 अगस्त को तमक में आई बाढ़ के लिए केवल तेज बारिश ही नहीं थी।
HighLights
तमक में बाढ़ का कारण सिर्फ बारिश नहीं, भू-आकृति भी
दून विश्वविद्यालय के अध्ययन ने भूवैज्ञानिक कारकों को बताया मुख्य
खड़ी ढलान, संकरी घाटी और मलबे ने बढ़ाई तबाही की तीव्रता
जागरण संवाददाता, देहरादून। Uttarakhand Flood News: तमक में 10 अगस्त की शाम आई अचानक बाढ़ के पीछे केवल तेज मानसूनी बारिश को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
दून विश्वविद्यालय के नित्यानंद हिमालयन रिसर्च एंड स्टडी सेंटर के प्रो. देवी दत्त चौनियाल के अध्ययन में सामने आया है कि क्षेत्र की बेहद खड़ी भू-आकृति, धारा का असाधारण ढाल, संकरी घाटी और बड़ी मात्रा में जमा पहाड़ी मलबे ने बारिश के पानी को तेजी से सैलाब में बदलने में अहम भूमिका निभाई।
वौटी गधेरा में अचानक आई थी बाढ़
अध्ययन के मुताबिक 10 अगस्त को शाम करीब पांच बजे धौली गंगा की सहायक धारा वौटी गधेरा में अचानक बाढ़ आई। करीब नौ किलोमीटर लंबी यह धारा लगभग 23 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का पानी समेटती है। धारा करीब 5782 मीटर की ऊंचाई से निकलती है और तमक के पास लगभग 2400 मीटर की ऊंचाई पर धौली नदी में मिलती है।
यानी महज नौ किलोमीटर में पानी को करीब 3300 मीटर की ऊंचाई का अंतर तय करना पड़ता है। इसकी औसत ढलान करीब 376 मीटर प्रति किलोमीटर है। ऐसे में तेज बारिश के दौरान पानी का बहाव बेहद तेजी से नीचे की ओर बढ़ सकता है।
संकरी घाटी ने बढ़ाई बहाव की ताकत
वौटी गधेरा के निचले हिस्से में करीब तीन किलोमीटर तक धारा संकरी घाटी से होकर गुजरती है। अध्ययन में घाटी की असममित बनावट और धारा के सीमित प्रवाह मार्ग को क्षेत्र की भू-संरचना से जोड़कर देखा गया है। ऐसी स्थिति में अचानक बढ़ने वाला पानी फैलने के बजाय संकरे चैनल में केंद्रित होकर तेज गति से आगे बढ़ सकता है। इससे कटाव और मलबा बहाने की क्षमता बढ़ जाती है।
पुराने हिमनदों का मलबा भी बना खतरा
वौटी गधेरा के ऊपरी और मध्य हिस्से में पुराने हिमनदों से जुड़ी सामग्री के साथ भू-स्खलन, चट्टान गिरने, स्क्री और टैलस का मलबा मौजूद है। तेज बारिश में यह ढीली सामग्री धारा में पहुंच सकती है। पानी के साथ मलबे की मात्रा बढ़ने पर अचानक बाढ़ अधिक विनाशकारी रूप ले सकती है।
पहाड़ों ने बढ़ाया बारिश का असर
बेसिन ऊंची पर्वत चोटियों और रिज से घिरा है। इसकी पूर्व-पश्चिम दिशा मानसूनी नमी वाली हवाओं के ऊपर उठने में भूमिका निभा सकती है। ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा के ऊपर उठने से संघनन और वर्षा की स्थिति बनती है। वहीं, खड़ी ढलानें बारिश के पानी को तेजी से जल निकासी तंत्र तक पहुंचाती हैं।
प्रो. चौनियाल के अध्ययन का निष्कर्ष है कि तमक की घटना मौसम, भू-आकृति और भू-विज्ञान के कई कारकों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है। छोटे जलग्रहण क्षेत्र, अत्यधिक ढलान, संकरी घाटी और ढीले मलबे की मौजूदगी के कारण ऐसे क्षेत्रों में कम समय में हुई भारी बारिश अचानक अत्यधिक तेज और विनाशकारी बाढ़ का रूप ले सकती है।
