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तमक नाले के ध्वस्त हाईवे पर रिकॉर्ड समय में शुरू हो गई आवाजाही, सेना और स्थानीय लोगों को राहत 

Published: Wed, 12 Aug 2026 12:35 AM (IST)

चमोली में तमक नाले पर ध्वस्त ज्योतिर्मठ-नीती-मलारी हाईवे को रिकॉर्ड 24 घंटे में बहाल कर दिया गया है।

ज्योतिर्मठ नीती हाईवे तमक नाले में ह्यूम पाइप डालकर अस्थाई मोटर मार्ग बनाने का कार्य करते हुए। सूवि

ज्योतिर्मठ नीती हाईवे तमक नाले में ह्यूम पाइप डालकर अस्थाई मोटर मार्ग बनाने का कार्य करते हुए। सूवि

जागरण संवाददाता, गोपेश्वर। चीन सीमा को जोड़ने वाले ज्योतिर्मठ-नीती-मलारी हाईवे पर 24 घंटे के रिकार्ड समय में वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है। सुबह से शाम तक युद्धस्तर पर चले अभियान के तहत तमक नाले में ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी मोटर मार्ग तैयार किया गया।

आइटीबीपी ने रस्सी के सहारे लोगों की पैदल आवाजाही भी कराई। आवाजाही सुचारु होने से स्थानीय लोगों और सेना को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यातायात बहाल किए जाने पर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की पीठ थपथपाई।

ज्योतिर्मठ से चीन सीमा की तरफ लगभग 40 किमी दूर नीती घाटी में बादल फटने से सोमवार शाम करीब साढ़े पांच तमक नाले में उफान आ गया था। इससे चीन सीमा को जोड़ने वाले ज्योतिर्मठ-नीती-मलारी हाईवे पर बना बेली ब्रिज बह गया था। पांच वाहन चपेट में आए थे और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के हवलदार पंकज कुमार भी सैलाब में बह गए थे।

साथ ही नीती घाटी के 14 गांवों का संपर्क कट गया था। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र होने के कारण मंगलवार सुबह से हाईवे पर यातायात बहाल करने के प्रयास शुरू हो गए।

तमक नाले में ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी मोटर मार्ग तैयार किया गया और शाम करीब छह बजे आवागमन सुचारु कर दिया गया। सेना के ब्रिगेडियर सहित अन्य अधिकारियों ने बीआरओ के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया।

पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट, एसडीएम ज्योतिर्मठ चंद्र शेखर वशिष्ठ भी सुबह से ही जुटे रहे। जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि मार्ग बहाली के कार्य में संबंधित विभागों और सुरक्षा एजेंसियों का समन्वय सुनिश्चित किया गया। इसके लिए आवश्यक संसाधन और मशीनरी मौके पर उपलब्ध कराई गई।

उन्होंने स्थानीय लोगों एवं वाहन चालकों से अपील की है कि अस्थायी मार्ग से आवागमन के दौरान विशेष सावधानी बरतें। साथ ही मौके पर तैनात प्रशासन एवं संबंधित विभागों की टीमों की ओर से दिए जा रहे सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप भी राहत और बचाव कार्य की स्थिति तथा मार्ग बहाली की प्रगति की जानकारी लेते रहे।

लापता हवलदार का नहीं चल सका पता

तमक नाले में आए सैलाब में बहे बीआरओ के हवलदार पंकज कुमार का दूसरे दिन भी पता नहीं चल पाया है। जिला प्रशासन, पुलिस, भारतीय सेना, आइटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और बीआरओ की टीमों ने संयुक्त रूप से सर्च अभियान चलाया। प्रभावित क्षेत्र के आसपास नदी किनारों में खोजबीन के साथ भी मलबे को भी खोदा गया। प्रशासन के अनुसार, बुधवार को भी खोजबीन अभियान जारी रखा जाएगा।

उफान की घटना का होगा वैज्ञानिक अध्ययन

तमक नाला में अत्यधिक जलप्रवाह और बड़ी मात्रा में मलबा आने की घटना का सरकार वैज्ञानिक अध्ययन कराएगी। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने इस सिलसिले में देश के प्रमुख वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों को पत्र भेजकर घटना के कारणों और भविष्य के संभावित जोखिम का विस्तृत अध्ययन करने का अनुरोध किया है। संबंधित संस्थानों को 15 दिन के भीतर रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराने को कहा गया है।