राज्य ब्यूरो, देहरादून: बहुद्देश्यीय सहकारी समितियों में सामने आ रही अनियमितता की शिकायतों ने सरकार के कान खड़े कर दिए हैं। इस कड़ी में राज्य की सभी 670 बहुद्देश्यीय सहकारी समितियों का विशेष ऑडिट कराया जाएगा। सहकारिता राज्यमंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने सोमवार को विधानसभा में हुई विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान इस संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण होना है। इससे पहले इनका विभागीय और विशेष ऑडिट हर हाल में करा लिया जाए, ताकि समितियों में पारदर्शिता से काम हो सके।

डॉ.रावत ने बैठक में कहा कि पिछले 15 वर्षाें में सहकारी समितियों में विशेष ऑडिट नहीं हुआ है। इस दरम्यान तमाम समितियों में अनियमितता की शिकायतें भी मिल रही है। ऐसे में सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण से पहले ऑडिट कराया जाना जरूरी है। इससे समितियों के कामकाज की समीक्षा तो होगी ही सही आंकड़े भी सामने आएंगे। इस पर बैठक में मौजूद समितियों, फेडरेशन और बैंक के अध्यक्षों ने सहमति जताई।

दीनदयाल उपाध्याय कृषि ऋण वितरण योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पूर्व में इस योजना में 13.50 करोड़ के ऋण बांटे गए थे। इस पर डॉ.रावत ने निर्देश दिए कि अधिकाधिक किसानों को इसका लाभ पहुंचाया जाए। बैठक में एक एकड़ भूमि के एवज में ऋण की राशि बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। विभिन्न समितियों के अध्यक्षों ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंक एक एकड़ भूमि पर तीन लाख तक का ऋण मंजूर कर रहे हैं, जबकि सहकारी बैंक मात्र 32 हजार रुपये ही स्वीकृत कर रहे हैं। इससे किसानों का रुख अन्य बैंकों की तरफ ज्यादा है।

सहकारिता राज्यमंत्री ने भूमि के सापेक्ष ऋण सीमा में बढ़ोतरी के मद्देनजर सभी तथ्यों का अध्ययन कर अधिकारियों को प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। बैठक में राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष दान सिंह रावत व उपाध्यक्ष महावीर प्रसाद कुकरेती, राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष बृजभूषण गैरोला व उपाध्यक्ष मातबर सिंह रावत, उत्तराखंड रेशम फेडरेशन के अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह व उपाध्यक्ष दयाल सिंह चौहान, स्टेट लेबर फेडरेशन के अध्यक्ष जगतराम शर्मा व उपाध्यक्ष अनवर हुसैन, निबंधक सहकारी समितियां बीएम मिश्रा, आदि मौजूद थे।

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस