राज्य ब्यूरो, देहरादून: उत्तराखंड के सभी नगर निकायों से रोजाना निकलने वाले कूड़ा-कचरे का अब वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण होगा। यही नहीं, सॉलिड वेस्ट को संसाधन मानते हुए इसका उपयोग बिजली और खाद बनाने में किया जाएगा। इसके अलावा सभी निकायों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के साथ ही कुछ निकायों में क्लस्टर आधार पर कचरे का निस्तारण किया जाएगा। यह सब राज्य की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नीति का हिस्सा है, जिसे बुधवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। अब प्रदेश में इसी के आधार पर कदम उठाए जाएंगे।

दरअसल, राज्य में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट-2016 को लेकर नियमावली तो अस्तित्व में थी, लेकिन एक्शन प्लान के तहत थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की नीति का मसौदा तैयार किया गया, जिसे बुधवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। नीति के अनुसार सभी 92 नगर निकायों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन पर फोकस किया जाएगा। सभी निकायों में जैविक कचरे से खाद बनाने के साथ ही बिजली भी बनाई जाएगी। जिन निकायों में कचरा निस्तारण के मद्देनजर ट्रेचिंग ग्राउंड नहीं हैं, वहां डीएम इसके लिए जल्द से जल्द भूमि उपलब्ध कराएंगे।

नीति के खास बिंदु

-डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को सभी निकाय करेंगे व्यवस्था

-जैविक व अजैविक कचरे को अलग-अलग कर किया जाएगा निस्तारण किया जाएगा

-जैविक कचरे से खाद और बिजली बनाने को लगेंगे संयंत्र

-प्लास्टिक जैसे अजैविक कचरे के निस्तारण को संबंधित संयंत्रों में भेजा जाएगा।

-कूड़ा निस्तारण में नवीनतम तकनीकी का भी होगा इस्तेमाल

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तीन दिन में तैयार की गई नीति

वर्ष 2016 के ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के तहत दो साल बाद भी उत्तराखंड समेत कुछ अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में कोई नीति न बनाए जाने पर हाल में सुप्रीम कोर्ट ने इन राज्यों को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद उत्तराखंड में भी हलचल हुई और तीन दिन के भीतर नीति बनाने के बाद इसे कैबिनेट में लाया गया।

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Posted By: Jagran