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उच्च हिमालय में रेस्क्यू की तैयारी, नंदा देवी खोज यात्रा पर जाएगा एसडीआरएफ और आईटीबीपी का दल

Published: Fri, 23 Oct 2026 08:07 PM (GMT+05:30)

उत्तराखंड में एसडीआरएफ और आईटीबीपी उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आपदा से निपटने के लिए जवानों की क्षमता बढ़ा रहे हैं। ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई से बनाई गई है

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सोबन सिंह गुसांई, देहरादून। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हर साल सामने आ रही आपदाओं और दुर्गम इलाकों में फंसने वाले पर्यटकों व ट्रेकर्स को सुरक्षित निकालने की चुनौती के बीच राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) अपने जवानों की क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

इसके लिए जवानों को उच्च हिमालयी परिस्थितियों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव दिलाया जाएगा। जल्द ही एसडीआरएफ व आइटीबीपी के जवानों का दल नंदा देवी खोज यात्रा पर जाएगा।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य जवानों को उच्च हिमालयी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों, कठिन रास्तों, दुर्गम पहाड़ियों और विषम मौसम में काम करने के लिए तैयार करना है। ताकि भविष्य में इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की आपदा आने पर राहत एवं बचाव अभियान तत्काल शुरू किया जा सके और प्रभावितों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन, भारी बारिश, बर्फबारी और अचानक मौसम खराब होने जैसी परिस्थितियां अक्सर राहत एवं बचाव कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना देती हैं। इन क्षेत्रों में ट्रेकिंग के लिए जाने वाले लोगों के फंसने या रास्ता भटकने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। इस साल उत्तरकाशी में भी कई ट्रेकर्स के फंसने की घटना ने दुर्गम क्षेत्रों में त्वरित रेस्क्यू की जरूरत को फिर सामने रखा था।

प्रशिक्षण से परखी जाएगी जवानों की क्षमता

एसडीआरएफ का मानना है कि आपदा के दौरान कार्रवाई के लिए जवानों को हमेशा तैयार स्थिति में रखना जरूरी है। इसके लिए समय-समय पर प्रशिक्षण और अभ्यास कराना आवश्यक है। नंदा देवी खोज यात्रा के माध्यम से जवानों को उच्च हिमालयी क्षेत्र में काम करने का अनुभव मिलेगा।

आइटीबीपी के साथ इस अभियान में शामिल होने से उन्हें दुर्गम परिस्थितियों में अभियान संचालित करने और पर्वतीय क्षेत्र में आगे बढ़ने की व्यावहारिक जानकारी हासिल करने का अवसर मिलेगा।

आपदा के समय तत्काल शुरू हो सकेगा रेस्क्यू

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आपदा आने पर शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। दुर्गम रास्तों और खराब मौसम के कारण राहत दल को घटनास्थल तक पहुंचने में समय लग सकता है।

नंदा देवी खोज यात्रा में शामिल होने वाले 10 जवानों को मिलने वाला अनुभव भविष्य में दुर्गम क्षेत्रों में होने वाली आपदाओं के दौरान उपयोगी हो सकता है। इससे ट्रेकर्स, पर्वतारोहियों और अन्य लोगों को संकट की स्थिति में समय पर सहायता पहुंचाने की तैयारी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

वर्ष 2019 में विदेशी पर्वतरोही हो गए थे लापता

वर्ष 2019 में उत्तराखंड की नंदा देवी चोटी फतह करने निकले विदेशी पर्वतारोही लापता हो गए थे। पर्वतारोहियों के शव करीब 21 हजार फीट की ऊंचाई पर मिले। इनमें ब्रिटेन, अमेरिका व आस्ट्रेलिया के पर्वतारोही शामिल थे। आइटीबीपी की टीम ने पर्वतारोहियों के शव बरामद किए थे।

जल्द ही एक दल को नंदा देवी खोज यात्रा पर भेजा जा रहा है। यह जवान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पहले भी रेस्क्यू कर चुके हैं। आइटीबीपी के साथ मिलकर यह खोज यात्रा की जाएगी। इस खोज यात्रा का उद्देश्य यह है कि भविष्य में कोई आपदा आती है तो तत्काल रेस्क्यू शुरू किया जा सके।
अर्पण यदुवंशी, सेनानायक, एसडीआरएफ

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