देहरादून, [सुकांत ममगाईं]: नौनिहालों की सुरक्षा का जिम्मा जितना अभिभावकों का है, उतना ही स्कूल प्रबंधन का भी। हालांकि इसकी समझ रखने वालों की संख्या अभी काफी कम दिख रही है, लेकिन उम्मीद की किरण नजर आ रही है। बच्चों के साथ परिसर में और आते-जाते वक्त होने वाली छेड़छाड़ और शोषण की घटनाओं को रोकने के लिए कदम बढ़े हैं। शिक्षा बोर्डों ने भी गाइडलाइन जारी की हैं। इस बीच, कुछ स्कूलों ने बच्चों पर नजर रखने के लिए हाईटेक व्यवस्था (मैकेनिज्म) बनाई है। यहां विभिन्न माध्यमों से बालमन को पढ़ने और उसमें छिपे डर को बाहर निकालने के निरंतर प्रयास हो रहे हैं। खासकर, गुड टच और बेड टच के मायने बताकर बच्चों और अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। इन्हीं में एक है राजधानी स्थित डीपीएस। 

सहस्रधारा रोड स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में हालांकि बच्चों के साथ दुर्व्यवहार जैसी कभी कोई घटना नहीं हुई, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने तमाम आशंकाओं का संज्ञान लेते हुए अपने यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। बच्चों के घर की दहलीज से निकलने से लेकर वापस पहुंचने तक की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रबंधन ने अपने ऊपर ली हुई है। स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस, बस लोकेशन एप, मैसेज डिलीवरी सिस्टम शामिल हैं। स्कूल परिसर में आते बच्चे सीसीटीवी सर्विलांस में आ जाते हैं। 

यहां प्रवेश द्वार, क्लास रूम, वॉश रूम के आसपास और परिसर का हर कॉरिडोर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में है। इसके लिए चालीस कैमरे लगाए गए हैं। छात्राओं के लिए वॉश रूम, क्लास रूम के साथ ही स्कूल बसों तक उन्हें छोड़ने के लिए महिला गार्ड को जिम्मेदारी सौंपी गई है। छात्राओं के क्लास रूम और वॉश रूम के आस-पास पुरुष गार्ड के प्रवेश पर भी पाबंदी है। 

हर दो महीने में काउंसलिंग 

स्कूल में हर दो महीने में बच्चों की काउंसलिंग कराई जाती है। अभिभावकों को भी इसमें बुलाया जाता है। उत्पीड़न, शोषण, मारपीट, मानसिक तनाव आदि पहलुओं पर इसमें खुलकर चर्चा होती है। काउंसलिंग में स्कूल के शिक्षक बच्चों के साथ उनके हर दुख-सुख पर चर्चा करते हैं। छात्राओं के साथ आत्मीयता से बात करके उनकी समस्या जानने का प्रयास किया जाता है। अगर कोई बच्चा गुमशुम या फिर चुप दिखता है तो उससे एकांत में सहजता से बातचीत की जाती है। 

ऑनलाइन शिकायत की व्यवस्था 

बच्चों और अभिभावकों के लिए ऑनलाइन शिकायत की व्यवस्था भी है। स्कूल की मेल आइडी, वाट्सएप नंबर, प्रधानाचार्य, मैनेजर और निदेशक के फोन नंबर और मेल आइडी सभी को उपलब्ध कराई जाती है। ताकि कोई भी शिकायत होने पर वह ऑनलाइन दर्ज कर सके। इन शिकायतों को 24 घंटे के भीतर निस्तारित करने की व्यवस्था बनाई गई है। 

प्रधानाचार्य बीके सिंह ने बताया कि बच्चों को बेड और गुड टच के बारे में जानकारी देने के अलावा उन पर नजर रखनी जरूरी है। स्कूल में तीन हजार छात्र-छात्राएं और तीन सौ से ज्यादा स्टाफ है। पढ़ाई के साथ-साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम यहां किए गए हैं। बच्चों के हर दुख-सुख को समझना भी जरूरी है। पढ़ाई, खेल और खाना भी बच्चों के साथ होता है। ऐसे में असुरक्षा जैसी कोई भावना बच्चों के भीतर नहीं रहती है। गार्ड, सुपरवाइजर और स्टाफ को समय-समय पर उनकी जिम्मेदारी का बोध कराया जाता है।

काउंसलिंग से तोड़ रहे बच्चों की झिझक 

रुड़की में शोषण और उत्पीड़न के प्रति बच्चों को जागरूक करने के लिए केंद्रीय विद्यालय-एक में किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम (एईपी) के तहत बेड टच और गुड टच की जानकारी दी जा रही है। स्कूल के वरिष्ठ शिक्षक यह जिम्मा संभाले हुए हैं। इसके शुरुआती अच्छे परिणाम भी सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में बच्चों की झिझक टूट रही है।   

प्रधानाचार्य वीके त्यागी बताते हैं कि स्कूल में बच्चों की सामूहिक और व्यक्तिगत काउंसिलिंग की जाती है। ताकि वह निसंकोच अपनी बात कह सकें। इसी का नतीजा है कि पिछले दिनों एक छात्रा ने बताया कि उसका रिश्ते का भाई परेशान करता है। डर के मारे अपने माता-पिता को उसने यह बात नहीं बताई थी। इसके बाद उन्होंने बच्ची के माता-पिता को बुलाया और दोनों की काउंसिलिंग की। बच्ची के साथ यह परेशानी दुबारा नहीं आई। कुछ अन्य बच्चों ने भी खुलकर शिक्षकों को अपनी दिरक्कतें बताईं। प्रधानाचार्य बताते हैं कि स्कूल में सप्ताह में एक दिन एईपी के तहत कक्षा भी चलाई जाती है। इसके तहत सेमीनार, डिबेट, पोस्टिर मेकिंग भी कराया जाता है। 

घटना से सबक, बनाई निगरानी समिति 

हरिद्वार जिले के लक्सर में एक सरकारी स्कूल में पांचवीं कक्षा की छात्रा के साथ हुई छेड़छाड़ ने स्थानीय लोगों की आंखें खोल दी। शिक्षक बच्ची को काफी दिनों से परेशान कर रहा था। पता चलने पर परिजनों ने शिक्षक की पिटाई करने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया। इससे सबक लेते हुए ग्राम प्रधान अनिल कुमार ने एक समिति का गठन किया। जिसमें स्कूल की शिक्षिकाएं और कुछ बच्चों की माताओं को शामिल किया है। यह समिति नियमित अंतराल पर स्कूल पहुंचकर छात्राओं की काउंसलिंग करती हैं। उन्हें बताया जाता है कि कोई गलत मंशा से टच करे तो उसके साथ कैसा बर्ताव करना है और कैसे अपना बचाव करना है। 

स्कूलों के लिए सीबीएसई की गाइडलाइन   

- संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी लगाएं, सुनिश्चित करें कि वो हमेशा चालू हालत में रहें 

- अभिभावक, अध्यापक और छात्रों को मिलाकर एक समिति बनाई जाए 

- स्कूल परिसर में बाहरी व्यक्तियों के आने जाने पर रोक लगे, विजिटर्स पर नजर रखी जाए 

- स्कूल स्टाफ को छात्रों के किसी भी तरह के शोषण से बचाने के लिए ट्रेनिंग दें 

- यौन उत्पीड़न मामलों के लिए अलग आंतरिक समिति बने 

- निर्देशों का पालन न करने पर स्कूल की मान्यता तक खत्म करने की चेतावनी 

बच्चों का काफी समय परिवार से दूर स्कूलों में बीतता है। मां-बाप घर पर  बच्चे को हर तरह की सहूलियत देते हैं। उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखते हैं, लेकिन घर से बाहर या स्कूल में कोई बच्चे से दुर्व्यवहार करे तो वह कुछ नहीं कर पाते। हालिया कुछ घटनाओं ने अभिभावकों का मन आशंकित किया है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित माहौल मिले। 

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Posted By: Raksha Panthari