यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 22, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
AIIMS Rishikesh : मशीन की खरीद फरोख्त व टेंडर में गड़बड़ी के मामले में एम्स के चिकित्सकों सहित आठ पर मुकदमा
सीबीआइ ने एम्स ऋषिकेश के सात बड़े अधिकारियों के खिलाफ संबंधी धाराओं में मुकदमे दर्ज किए हैं। सीबीआइ की टीम ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता,देहरादून / ऋषिकेश : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में रोड स्वीपिंग मशीन की खरीद और केमिस्ट शाप के आवंटन में गड़बड़ी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) बड़ी कार्रवाई की। इस सिलसिले में सीबीआइ ने आपराधिक षडयंत्र कर धोखाधड़ी करने के दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
इनमें एम्स के तीन प्रोफेसरों, एक प्रशासनिक अधिकारी और एक लेखाधिकारी को नामजद किया गया है। इसके साथ ही सीबीआइ ने शुक्रवार को उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में 24 स्थानों पर आरोपितों के ठिकानों पर छापे डाले।
सीबीआइ ने दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए
एम्स ऋषिकेश में उपकरणों की खरीद और दवा की दुकान के आवंटन में गड़बड़ी की जांच सीबीआइ फरवरी से कर रही थी। तीन से सात फरवरी तक सीबीआइ टीम ने यहां डेरा डालकर शिकायतों से संबंधित दस्तावेज खंगाले थे। अब इस प्रकरण में सीबीआइ ने दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं।
सीबीआइ प्रवक्ता के मुताबिक एम्स प्रशासन ने वर्ष 2017-18 में अस्पताल परिसर की सड़कों की सफाई के लिए स्वीपिंग मशीन खरीदी थी। जिस कमेटी के माध्यम से खरीद प्रक्रिया पूरी कराई गई, उसमें अनियमितता पाई गई। इसमें करीब 2.41 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की गई।
इतनी बड़ी लागत से खरीदी गई यह मशीन सिर्फ 124 घंटे ही चल पाई। जांच में यह भी सामने आया कि एक अन्य कंपनी इसी मशीन को करीब एक करोड़ में उपलब्ध करा रही थी, लेकिन क्रय समिति ने महंगे दामों पर मशीन की खरीद कर डाली।
इस मामले में एम्स के माइक्रोबायोलाजी विभाग में तैनात तत्कालीन अतिरिक्त प्रोफेसर बलराम जी उमर, एनाटामी विभाग के तत्कालीन अध्यक्ष प्रोफेसर बृजेंद्र सिंह, तत्कालीन सहायक प्रोफेसर अनुभा अग्रवाल निवासी ऋषिकेश देहरादून, प्रशासनिक अधिकारी शशि कांत, लेखाधिकारी दीपक जोशी और खनेजा कांप्लेक्स शकरपुर दिल्ली स्थित प्रो-मेडिक डियाईसेस के स्वामी पुनीत शर्मा को नामजद किया गया है। इस मुकदमे में कुछ अन्य लोक सेवक और निजी क्षेत्र के अज्ञात व्यक्ति भी आरोपित हैं।
अधिकारियों ने निविदा प्रक्रिया में मानदंडों का उल्लंघन किया
एम्स परिसर में केमिस्ट शाप के आवंटन मामले में सीबीआइ ने त्रिवेणी सेवा फार्मेसी कंपनी के साथ ही उसके साझेदार पंकज शर्मा (निवासी शेरगढ़ टापू पोस्ट घीर जिला करनाल हरियाणा) और शुभम शर्मा (निवासी राजपुर पोस्ट आफिस पथेरा करनाल हरियाणा) और एक अन्य लोक सेवक अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि एम्स अधिकारियों ने निविदा प्रक्रिया में मानदंडों का उल्लंघन किया।
प्रतिष्ठित बोलीदाताओं को दरकिनार किया, दस्तावेजों की जांच में ईमानदारी नहीं दिखाई। यही नहीं, उन महत्वहीन फर्म को केमिस्ट शाप संचालित करने की अनुमति दी, जिन्होंने निविदा दस्तावेजों में गलत तथ्य प्रस्तुत किए थे। यह भी आरोप है कि प्रक्रिया में शामिल व्यक्तियों ने अनियमितता के सुबूत भी नष्ट कर दिए।
इस सिलसिले में शुक्रवार को सीबीआइ ने नामजद आरोपियों के उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के 24 शहरों में दबिश दी। इनमें प्रमुख रूप से कानपुर, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली, ऋषिकेश, हरिद्वार शामिल रहे। सीबीआइ टीम सुबह करीब साढ़े सात बजे टीम ऋषिकेश पहुंची। यहां उसने एम्स के आवासीय परिसर में रह रहे दो प्रोफेसरों और महिला अधिकारी के ऋषिकेश स्थित ठिकाने पर छापा मारा गया। छापे में टीम ने कुछ दस्तावेज भी कब्जे में लिये हैं।
अभी कई अधिकारी सीबीआइ के रडार पर
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में टेंडर, मशीनें और सामग्री की खरीदारी में हुई अनियमितता के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआइ एम्स ऋषिकेश में विभिन्न पदों पर नियुक्तियों में हुई गड़बड़ी सहित अन्य मामलों की भी जांच भी कर रही है। इन जांचों को लेकर एम्स के अधिकारी अभी सीबीआइ टीम की रडार पर हैं।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश पूर्ण रूप से संचालित होने के बाद किसी ने किसी मामले में चर्चाओं में रहा है। विभिन्न पदों पर हुई स्थायी और अस्थायी नियुक्तियों पर समय-समय पर सवाल उठते रहे। सीबीआइ की ओर से मशीन की खरीद में घोटाला, मेडिकल स्टोर के टेंडर में गड़बड़ी के मामले में रिपोर्ट दर्ज होना सीबीआइ की कार्रवाई की अभी शुरुआत माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक स्थायी पदों पर नियुक्तियां, आउट सोर्स के जरिये विभिन्न पदों पर हुई नियुक्तियां भी सीबीआइ की जांच में शामिल है।
बड़े पद पर आसीन रहे एक अधिकारी की ओर से अपनी सेवानिवृत्ति से एक दिन पूर्व आउट सोर्स में 25 नर्सिंग आफिसर की नियुक्ति भी चर्चा में रही है। इन सभी नियुक्तियों को हालांकि 31 मार्च को रद कर दिया गया है। मामला चर्चा में इसलिए आया कि कोरोना संक्रमण काल समाप्त हो जाने के बाद यह नियुक्तियां की गई थी।
ऋषिकेश एम्स में नर्सिंग आफिसर के स्थायी पदों पर राजस्थान प्रदेश से 600 से अधिक अभ्यर्थियों की भर्ती इस दौरान चर्चा का विषय बनी रही। इसी के साथ एम्स के भीतर निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। एम्स के भीतर विभिन्न विभागों में सामग्री आपूर्ति करने वाले वेंडर भी सीबीआइ के रडार में है।