जागरण संवाददाता, देहरादून : शिक्षा का अधिकार में भी दाखिले के अधिकार से हजारों छात्रों वंचित रह जाएं, तो यह कैसा अधिकार है। शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर की निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को आरक्षित की जाती हैं। इसके लिए तमाम प्रक्रिया पूरी करने वाले अभिभावक ही अच्छे निजी स्कूलों की चौखट तक पहुंचे, लेकिन कई अभिभावक कोशिश के बाद भी सफल नहीं हुए।

13 जिलों के निजी स्कूलों में 33,672 सीटें निर्धारित

शिक्षा विभाग ने जो लिस्ट जारी की उससे तो यही प्रतीत होता है। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत प्रदेशभर के 13 जिलों के निजी स्कूलों में 33,672 सीटें निर्धारित हैं। इस वर्ष इन सीटों के सापेक्ष 28,066 ने आवेदन किया। लेकिन लाटरी के माध्यम से निकली गई लिस्ट में केवल 17662 छात्र-छात्राओं को दाखिला मिल पाया।

11,750 छात्रों के आवेदन सही नहीं पाए गए

4260 छात्र-छात्राओं के नाम लाटरी में शामिल तो थे, लेकिन उनके मनपसंद स्कूलों में सीट न होने के कारण उन्हें दाखिला नहीं मिल पाया। 33672 आवेदनों में से 11,750 छात्रों के आवेदन सही नहीं पाए गए। जिससे उनका दावा खारिज माना गया।

समग्र शिक्षा के अपर परियोजना निदेशक डा. मुकुल कुमार सती कहते हैं कि जिन छात्र-छात्राओं के नाम निजी स्कूलों में लाटरी के माध्यम से चयनित हुए हैं, उनके नाम की लिस्ट स्कूलों में चस्पा कर दी गई है और शिक्षा विभाग के वेबसाइट पर भी अपलोड कर दी जाएगी। ताकि किसी भी छात्र और उनके अभिभावकों को दिक्कत न हो। जिन छात्रों के नाम लिस्ट में शामिल किए गए हैं, वह छात्र अपनी-अपनी स्कूलों से संपर्क कर दाखिले के लिए आवश्यक नियमों का पालन करते हुए दाखिला ले सकते हैं।

मोबाइल नंबर पर भी भेजी जाए सूचना

उन्होंने निजी स्कूलों को निर्देशित किया कि चयनित छात्रों के चयन की सूचना उनके मोबाइल नंबर पर भी भेजी जाए। लाटरी घोषित होने के बाद चयनित छात्र-छात्राओं को 20 जुलाई से पूर्व दाखिला लेना होगा। निर्धारित समय के बाद स्कूलों में उपस्थित न होकर और दाखिला नहीं लेने वाले छात्र-छात्रा का आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। प्रदेश में सबसे अधिक आवेदन चार मैदानी जिलों से प्राप्त हुए।

Edited By: Nirmala Bohra