किसानों ने 40 बीघा धान की खड़ी फसल पर चलाया ट्रैक्टर

- धान की हाइब्रिड प्रजाति की फसल खराब होने पर की जुताई

-जिंक व पोटाश की कमी, अगेती रोपाई को माना जा रहा कारण

जागरण संवाददाता, विकासनगर: पछवादून में कई स्थानों पर धान की हाइब्रिड प्रजाति की फसल खराब हो चुकी है। कहीं पर जिंक व पोटाश की कमी से पौधे बौने होकर पीले पड़ गए हैं तो कहीं पर रोग ने फसल चोपट कर दी है। धान की फसल में यह समस्या हाइब्रिड में ही नजर आ रही है, अन्य प्रजातियां खेतों में लहलहा रही हैं। हाइब्रिड धान की फसल खराब होने पर छह से अधिक किसानों ने बुधवार को अपने खेतों में खड़ी करीब 40 बीघा धान की फसल को ट्रेक्टर से जोत दिया। कर्ज लेकर धान लगाने वाले किसानों के चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही है।

इस बार पूरे जिले में धान की हाइब्रिड प्रजातियों में तमाम तरह की दिक्कतें आई हैं। पौधों की वनस्पतिक वृद्धि रुक गई है, पौधे बौने होकर पीले पड़ गए हैं। किसानों की इस समस्या से चिंतित कृषि विज्ञानियों व अधिकारियों ने खेतों में जाकर वस्तुस्थिति देखी, उपाय भी बताए, लेकिन भीमावाला क्षेत्र में समस्या हल ही नहीं हुई। जिस पर आक्रोशित छह से अधिक किसानों ने अपने खेतों में खड़ी करीब 40 बीघे के आसपास धान की फसल को ट्रेक्टर से जोत दिया। खेत जोतने वाले किसान सुभाष धीमान, गुलफाम अहमद, जाहिर, साजिद अली ने कहा कि धान की खेती के लिए बैंकों से लोन लिया था। सहकारी समितियों में इस बार गुणवत्ता वाला पोटाश नहीं था। सोसायटी में मिलने वाले पोटाश कम प्रतिशत का है, जबकि पहले साठ प्रतिशत पोटाश होता था। यदि सहकारी समितियों से जिंक व पोटाश समय पर मिल जाता तो धान की फसल खराब होने की गुंजाइश कम रहती।

उधर, मुख्य कृषि अधिकारी लतिका सिंह के अनुसार धान की हाइब्रिड प्रजाति में इस बार समस्याएं दिखाई दी हैं, जिसके लिए कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के विज्ञानियों ने किसानों की धान की फसल देखी है। जिंक व पोटाश की कमी और अन्य रोग की रोकथाम के उपाय भी बताए हैं। जिन किसानों ने फसल बीमा में पंजीकरण कराया होगा, उनकी नुकसान की भरपाई हो सकेगी। गुरुवार को कृषि अधिकारी को मौके पर भेजकर वस्तुस्थिति का पता लगाया जाएगा।

कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के विज्ञानी डा. संजय राठी के अनुसार किसान फसल चक्र पर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। धान की ज्यादा अगेती रोपाई कर देते हैं। जिस समय पर रोपाई करते हैं, उस समय तापमान ज्यादा होता है। खेत में भरे पानी के गर्म होने से भी रोपे गए धान को नुकसान होता है। जल में घुलनशील उवर्रकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिन किसानों ने समय रहते जिंक व पोटाश का इस्तेमाल फसल में किया है, वहां पर समस्या दूर हुई है।

Edited By: Jagran