ज्यादा वक्त नहीं गुजरा, जब उत्तराखंड के अन्य क्षेत्रों की भांति दूनवासियों को भी बेहतर उपचार के लिए दिल्ली अथवा चंडीगढ़ का रुख करना पड़ता था। लेकिन, अब गंभीर रोगों का उपचार दून में ही मुमकिन है। स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में दून मेडिकल हब बनने की दिशा में जो अग्रसर है। राज्य गठन के बाद सरकारी क्षेत्र का दून अस्पताल, मेडिकल कॉलेज में तब्दील हुआ तो निजी क्षेत्र का बड़ा मेडिकल कॉलेज भी यहां है।

यही नहीं, एक दशक के दरम्यान शहर में कई नामचीन मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल खुले हैं। इससे स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं में इजाफा हुआ है। बावजूद इसके स्वास्थ्य की राह में चुनौतियां भी कम नहीं है। बदलती जीवनशैली और खान-पान के कारण यहां बीमारियों का दायरा भी बढ़ा है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, श्वास संबंधी रोगों के मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।

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सूरतेहाल, मरीज की आर्थिक स्थिति और सरकारी-गैर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कसौटी पर फर्क करें तो मौजूदा हेल्थ सिस्टम में असंतुलन की खाई भी दिखती है, जिसे पाटने की बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी तमाम चुनौतियों से पार पाने को स्वस्थ बहस और बदलाव के लिए सुझाव का मौका देने जा रहा है, दैनिक जागरण का 'माय सिटी-माय प्राइड' अभियान। आइये जुड़ें इस महाभियान से, ताकि हर दूनवासी तक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने की दिशा में उठाए जा सकें कदम।

पाटनी होगी असंतुलन की खाई

दून ने जिस प्रकार शिक्षा हब के तौर पर कदम जमाए हैं, उसी तरह स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी। पहले बात राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार रहे दून अस्पताल की, जिसे सरकार ने मेडिकल कॉलेज में तब्दील कर दिया है। यह बदलाव भविष्य में कितना मुफीद होगा, ये तो आने वाले दिनों में पता चल जाएगा, मगर इस परिवर्तन काल में मरीज तमाम तरह की दुश्वारियों से भी रूबरू हो रहे हैं।

सूरतेहाल, आमजन तक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से मुहैया कराने के मद्देनजर दून में स्थित अन्य सरकारी अस्पतालों मसलन, कोरोनेशन, प्रेमनगर, नेत्र अस्पताल, रायपुर को सुदृढ़ करने की चुनौती है। निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं पर नजर दौड़ाएं तो एक निजी मेडिकल कॉलेज के अलावा कई नामचीन अस्पतालों के साथ ही दो सौ से अधिक छोटे-बड़े निजी अस्पताल यहां हैं। शहर में सेवारत व सेवानिवृत्त केंद्रीय कर्मचारियों का एक बड़ा तबका है।

इसके अलावा पूर्व सैनिक भी काफी तादाद में हैं। इनके लिए सीजीएचएस व ईसीएचएस के जरिए निजी क्षेत्र में इलाज कराना आसान है, जिनमें कई बड़े व नामचीन अस्पताल शामिल हैं। अलबत्ता, एक बड़ा वर्ग अब भी उस हैसियत में नहीं कि किसी बड़े निजी अस्पताल में जाकर उपचार करा सके। सूरतेहाल, यह असंतुलन पाटना ही सबसे बड़ी चुनौती है।

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बीमारियों का भी बढ़ा दायरा

बदलती जीवनशैली और पर्यावरणीय दुष्प्राभवों के फलस्वरूप दून में एक तरफ जहां मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, श्वास जैसे रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, वहीं डेंगू, स्वाइन फ्लू, स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियां भी तेजी से जकड़ रही हैं। हालांकि, इनके उपचार के लिहाज से आज कई विकल्प खुले हैं।

ये बात अलग है कि स्वाइन फ्लू के ब्लड सैंपल अब भी जांच को दिल्ली भेजे जा रहे हैं, जिनकी रिपोर्ट आने में तकरीबन सप्ताहभर का वक्त लगता है। स्थानीय स्तर पर प्राइवेट में जांच की व्यवस्था जरूर है, पर यह बहुत महंगी है। यही नहीं, सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों व संसाधनों की कमी भी खासी बड़ी चुनौती है।

ऐसे दूर होगी कठिनाइयां

सरकारी व निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के मध्य पनपी खाई को पाटने के जतन भी हो रहे हैं। मसलन, प्रदेश सरकार की योजना मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना ने निम्न व निम्न मध्यम वर्ग को कुछ हद तक राहत दी है। इसमें वह किसी भी अनुबंधित अस्पताल में 1.75 लाख तक का निश्शुल्क इलाज करा सकते हैं। इसी तरह यू-हेल्थ कार्ड योजना में राज्यकर्मी व पेंशनर कवर हैं। इन बीमा योजनाओं को अब 'आयुष्मान भारतÓ के तहत लाया जा रहा है। इतना ही नहीं अनुबंधित अस्पतालों की संख्या भी बढ़ेगी।

जिला अस्पताल की कवायद

दून अस्पताल के मेडिकल कॉलेज बनने के बाद अब कोरोनेशन व नेत्र अस्पताल को मर्ज कर नया जिला अस्पताल बनाने की तैयारी है। कोरोनेशन में 100 बेड बढ़ाने को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बजट भी स्वीकृत हो चुका है। यही नहीं, नेत्र अस्पताल में मॉडल मेटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ विंग की स्थापना की है। निकट भविष्य में आई बैंक की भी स्थापना की जानी है। यह अपनी तरह का एक अभिनव प्रयास है। जाहिर सी बात है कि आमजन को सरकारी स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवा के लिए इस पहल को तेजी से धरातल पर आकार देना होगा।

वायरोलॉजी लैब

अच्छी खबर यह है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दून में अत्याधुनिक वायरोलॉजी लैब स्थापित करने की इजाजत दे दी है। हाल में ही केंद्र की टीम ने यहां विभिन्न स्वास्थ्य इकाईयों की निरीक्षण किया था। बहरहाल यह कहा जा सकता है कि स्वास्थ्य के लिहाज से दून की तस्वीर तेजी से बदली है। बस जरूरत इस क्षेत्र से जुड़े असंतुलन को दूर करने की है।

दून में स्वास्थ्य सेवाओं पर एक नजर

संस्थान, संख्या
मेडिकल कॉलेज

सरकारी 01
निजी 02

अस्पताल 

सरकारी 04
निजी क्षेत्र 200 लगभग
निजी लैब 70 लगभग

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Posted By: Ashish Maharishi