यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Uttarakhand News: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा- पशु चिकित्सकों को भी मिलेगा एनपीए का लाभ
देहरादून के हाथीबड़कला स्थित सर्वे आफ इंडिया स्टेडियम में पशुपालन विभाग की ओर से विभिन्न योजनाओं का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, देहरादून: उत्तराखंड में पशु चिकित्सा के लिए मोबाइल चिकित्सा इकाई की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सर्वे स्टेडियम में 60 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने गोट वैली योजना की भी शुरुआत की।
वहीं, पशुलोक ऋषिकेश में हीफर रियरिंग फार्म, उत्तराखंड पशु चिकित्सा परिषद के परिसर में नवीन प्रशिक्षण केंद्र व राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम योजना के तहत एकत्रीकरण सह प्रजनन फार्म का भी लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत श्यामपुर में अतिहिमीकृत वीर्य प्रयोगशाला का भी शिलान्यास किया। यह घोषणा की कि पशु चिकित्सकों को भी एनपीए दिया जाएगा।
पशुपालन विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि मोबाइल चिकित्सा इकाईयों से राज्य के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में आपातकालीन पशु चिकित्सा सेवाएं एवं पशुपालन संबंधी अन्य विभागीय सेवाएं आसानी से प्रदान की जा सकेंगी। इसके लिए टोल फ्री नंबर 1962 जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत नेशनल डिजिटल लाइवस्टाक मिशन को चंपावत एवं ऊधमसिंह नगर में भी शुरू किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन एवं कृषि उत्तराखंड के लाखों परिवारों की आर्थिकी की रीढ़ है। 80 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार प्रदान करने वाला पशुपालन व्यवसाय न केवल उनकी आजीविका का मुख्य साधन है, बल्कि संतुलित पोषण का भी मुख्य आधार है। पशुपालन व्यवसाय का राज्य सकल घरेलू उत्पादन में तीन प्रतिशत योगदान है। पशुपालन व्यवसाय में निवेश ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का भी मुख्य साधन हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में पहली बार डेयरी पशुओं का सबसे बड़ा डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत प्रत्येक पशु को एक विशिष्ट टैग लगाया जा रहा है। डेयरी व्यवसाय क्षेत्र के लिए विकसित किया गया डिजिटल पेमेंट सिस्टम भी बदलते भारत का उदाहरण है।
प्रधानमंत्री ने महिलाओं को डेयरी क्षेत्र की वास्तविक नायिका बताया है, क्योंकि आज भी पशुओं की देखभाल अधिकतर मातृशक्ति ही करती हैं। गांवों में मातृशक्ति को सबसे अधिक समस्या चूल्हे पर खाना बनाने से होती थी, पर केंद्र सरकार ने जो गोवर्धन योजना प्रारंभ की है, उससे गावों में गोबर गैस प्लांट लगाकर इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य ने लंपी स्किन डिजीज को पूरी तरह से नियंत्रित करने में सफलता मिल गई है। प्रदेश में लगभग छह लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। कहा, जैविक कृषि का मुख्य आधार भी पशुधन ही है। इसके लिए पशुओं के गोबर को जैविक फार्म्स तक पहुंचाने के लिए भी सरकार विशेष प्रयास कर रही है। यह आशा व्यक्त की कि पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में नवीन प्रयासों से न केवल राज्य में युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि ग्रामीण आर्थिकी भी मजबूत होगी और रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को नई गति मिलेगी।
इस दौरान कृषि मंत्री गणेश जोशी, पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा, महापौर सुनील उनियाल गामा, विधायक उमेश शर्मा काऊ, गो सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, केंद्र के सचिव पशुपालन राजेश कुमार, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, बीवीआरसी पुरुषोत्तम, निदेशक पशुपालन डा. प्रेम कुमार आदि उपस्थित थे।
35 मोबाइल पशु चिकित्सा वाहन और मिलेंगे
केंद्रीय पशुपालन राज्य मंत्री डा. संजीव बालियान ने कहा कि राज्य में 95 विकासखंड हैं। ऐसे में उत्तराखंड को 35 मोबाइल पशु चिकित्सा वाहन और दिए जाएंगे। एंबुलेंस में तैनात संविदा पशु चिकित्सक को न्यूनतम 56 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसकी अधिसूचना जल्द जारी कर दी जाएगी। कहा कि राज्य में केंद्र की मदद से वन हेल्थ प्रोग्राम को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित किया जाएगा। कालसी पशु प्रजनन फार्म को भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के सफल क्रियान्वयन एवं प्रशिक्षण के लिए सेंटर फार एक्सीलेंस का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि और पशुपालन एक दूसरे के पूरक हैं। इन्हें साथ मिलकर चलने की जरूरत। चुटकी लेते कहा कि बड़े भाई, कृषि विभाग ने पशुपालन के साथ वही बर्ताव किया, जो कभी यूपी ने उत्तराखंड के साथ किया था। तभी दोनों अलग हुए। उन्होंने कहा कि पशुपालन पर बजट खर्च अभी भी कम है। जबकि ये पलायन को रोकने में मददगार है।
रिवर्स माइग्रेशन में मददगार होगी गोट वैली
पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि पशुपालन के क्षेत्र में लोग की आजीविका बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है। पशुपालन के माध्यम से मातृशक्ति को सशक्त बनाने एवं रिवर्स माइग्रेशन की पहल की गई है। इसी क्रम में बागेश्वर से गोट वैली की शुरुआत की गई है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग, पौड़ी, चमोली, अल्मोड़ा व ऊधमसिंह में भी योजना संचालित की जाएगी। इस योजना को हब एंड स्पोक माडल के तहत एक ब्रीड मल्टीप्लायर फार्म के साथ जोड़ते हुए चलाया जाएगा। संघ के सदस्यों को 20 प्लस वन की 100 यूनिट उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का प्रयास है कि गाय के साथ ही बकरी के दूध को भी तेजी से बढ़ावा दिया जाए।
