यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 04, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
समग्र शिक्षा अभियान का हिस्सा होगी प्री-प्राइमरी शिक्षा, पढ़िए पूरी खबर
प्रदेश में प्री-प्राइमरी शिक्षा अब स्कूली शिक्षा का हिस्सा होगी। इसे समग्र शिक्षा अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा। राज्य सरकार ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, देहरादून। प्रदेश में प्री-प्राइमरी शिक्षा अब स्कूली शिक्षा का हिस्सा होगी। इसे समग्र शिक्षा अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा। राज्य सरकार अगले शैक्षिक सत्र से इसके क्रियान्वयन का खाका तैयार करने में जुट गई है। अभी तक प्रदेश में स्कूली शिक्षा में प्री-प्राइमरी शिक्षा का प्रविधान नहीं है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्री प्राइमरी शिक्षा पर काफी जोर दिया गया है। इसे आंगनबाड़ी से जोड़कर करीब तीन साल का खाका तैयार किया गया है। इसमें दो सालों में पहली और दूसरी की पढ़ाई शामिल होगी। इसके साथ ही तीन साल की प्राथमिक स्टेज, जिसमें तीसरी से पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई होगी। इसके बाद तीन साल की मिडिल स्टेज होगी, जिसमें छठवीं से आठवीं तक पढ़ाई कराई जाएगी। इसके बाद चार साल की सेकेंडरी स्टेज होगी, जिसमें नौवीं से बारहवीं तक पढ़ाई होगी।
प्रदेश सरकार स्कूली शिक्षा के इस स्वरूप के क्रियान्वयन का खाका तैयार कर रही है। जोर इस बात पर है कि अगले शैक्षिक सत्र से ही इसे ठोस कार्ययोजना के साथ अमल में लाया जाएगा। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने बीते दिनों नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को स्कूली शिक्षा के स्तर पर गठित टास्क फोर्स के साथ बैठक की। बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक स्कूलों को साथ लाने के लिए कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
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उन्होंने कहा कि प्री प्राइमरी शिक्षा में आंगनबाड़ी केंद्रों की अहम भूमिका होगी। इस वजह से इन केंद्रों को प्राथमिक विद्यालयों के समीप लाने पर मंथन शुरू हो चुका है। ऐसे करीब पांच हजार आंगनबाड़ी केंद्र हैं जिन्हें प्राइमरी स्कूलों के नजदीक लाया जा चुका है। केंद्र ने सभी राज्यों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई की मॉनीटरिंग को भी चुस्त किया जाएगा। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के भरोसे ही बच्चे रहे हैं। इस व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
