देहरादून, [जेएनएन]: दून में पहली बार दीपावली पर ग्राउंड जीरो यानी स्पॉट की वास्तविक स्थिति के अनुसार वायु प्रदूषण के आंकड़े एकत्रित किए गए। इसके लिए गति फाउंडेशन ने शहर के 10 विभिन्न स्थानों पर हैंडसेट उपकरणों की मदद से प्रदूषण के आंकड़े रिकॉर्ड किए। नतीजे बेहद चौंकाने वाले निकल कर आए और दून में पार्टिकुलेट 2.5 व 10 की स्थिति सीमा से 15 गुना तक अधिक पाई गई। यानी दून में दीपावली की रात बेहद जहरीली हवा में सांस ली। 

गति फाउंडेशन ने दीपावली के मद्देनजर पांच नवंबर से दून में वायु प्रदूषण की मॉनीटरिंग कर रहा है। यह कार्य नौ नवंबर तक किया जाएगा। दीपावली की रात एकत्रित किए गए आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि पीएम 2.5 का आंकड़ा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की सीमा (24 घंटे के अनुसार) से कहीं अधिक 859 तक जा पहुंचा था। जबकि पीएम-10 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की सीमा से 1330 तक जा पहुंचा।

गति फाउंडेशन के सह संस्थापक आशुतोष कंडवाल ने बताया दून में वायु प्रदूषण पहले ही मानक से अधिक है। हालांकि, पांच नवंबर की बात करें तो स्थिति वायु प्रदूषण का स्तर काफी कम नजर आता है। छोटी दीपावली यानी छह नवंबर को वायु प्रदूषण सामान्य की अपेक्षा काफी बढ़ा हुआ मिला। जबकि सात नवंबर को दीपावली की रात वायु प्रदूषण की स्थिति काफी भयावह नजर आती है, जिसे आंकड़ों में स्पष्ट देखा जा सकता है। 

इस दफा आतिशबाजी में आई कमी 

बेशक वायु प्रदूषण के आंकड़े अभूतपूर्व व बेहद चौंकाने वाले हैं, मगर इस दीपावली आतिशबाजी में काफी कमी नजर आई। यदि पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वायु प्रदूषण के आंकड़े जारी करता तो पिछले साल की अपेक्षा प्रदूषण का स्तर पता चल पाता। इस दफा प्रदूषण इसलिए भी अधिक दर्ज किया गया है, क्योंकि गति फाउंडेशन ने स्पॉट पर जाकर मॉनीटरिंग की है। जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्थाई स्टेशनों से मॉनीटरिंग करता है और ज्यादातर स्टेशन घनी आबादी वाले इलाकों से दूर हैं। 

गति फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल का कहना है कि वायु प्रदूषण के आंकड़े बताते हैं कि दीपावली पर आतिशबाजी से हवा किस हद तक जहरीली हो जाती है। जबकि दीपावली से पहले के दिनों में प्रदूषण का ग्राफ बेहद कम पाया गया। 

सुप्रीम कोर्ट के बहाने जिम्मेदारी से बचा बोर्ड 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधार बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय अपनी जिम्मेदारी से साफ बच गया। यह पहला मौका है जब बोर्ड ने यह दायित्व इस बार नहीं निभाया। जबकि हर व्यक्ति जानने का इच्छुक रहता है कि दीपावली पर दून की हवा में कितना जहर घुला। जबकि बोर्ड इसके लिए अधिकृत संस्था है। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में एक नवंबर से लेकर 14 नवंबर तक वायु प्रदूषण के आंकड़े एकत्रित करने हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा कि आंकड़े जारी न किए जाएं। वैसी भी सामान्यत: बोर्ड को प्रदूषण के आंकड़े जल्द से जल्द अपनी वेबसाइट पर जारी करने होते हैं। इसके बाद भी आंकड़ों को लेकर बोर्ड की ऐसी उदासीनता समझ से परे है। यदि अब 14 नवंबर के बाद बोर्ड वायु प्रदूषण के आंकड़े जारी करता भी है तो तब उनका उतना महत्व नहीं रह जाएगा। क्योंकि ताजा स्थिति में प्रदूषण के आंकड़ों से लोग जागरूक भी होते हैं और कहीं न कहीं वह मनन करने को विवश भी होते हैं कि उन्होंने शहर की हवा में एक ही रात में कितना जहर घोल दिया।

बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एसएस राणा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण के आंकड़े जमा कराने की बाध्यता के चलते ही उससे पहले इन्हें जारी नहीं किया जा रहा। 14 तारीख के बाद सभी आंकड़े जारी कर दिए जाएंगे। हालांकि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हरिद्वार के क्षेत्रीय अधिकारी ने वायु प्रदूषण के आंकड़े सार्वजनिक कर दिए हैं। एक ही संस्थान में उभरे इस विरोधाभास से कहीं न कहीं सिस्टम पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। 

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Posted By: Raksha Panthari