देहरादून, राज्य ब्यूरो। राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर उत्तराखंड के चीन सीमा से सटे गांवों के विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद कसरत में जुट गई है। परिषद के निर्देशों के क्रम में राज्य के ऐसे सीमांत गांवों के लिए कार्ययोजना बनाने के मद्देनजर ग्राम्य विकास और पलायन आयोग की टीम 14 से 16 अक्टूबर तक उत्तरकाशी की नेलांग घाटी के गांवों का दौरा करेगी। 

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे देश के गांवों पर ध्यान केंद्रित किया है। इसी कड़ी में उत्तराखंड के चीन सीमा से सटे गांवों को लेकर परिषद अलर्ट मोड में है। उत्तराखंड के चार विकासखंड धारचूला और मुनस्यारी (पिथौरागढ़), जोशीमठ (चमोली) और भटवाड़ी (उत्तरकाशी) चीन सीमा से लगे हैं। बीती 27 सितंबर को दिल्ली में हुई बैठक में परिषद ने उत्तराखंड सरकार को इन विकासखंडों के गांवों के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे। इस बैठक में पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ.एसएस नेगी ने पलायन को लेकर प्रस्तुतीकरण दिया था। 
अब परिषद के निर्देशों के क्रम में पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. नेगी की अगुआई में एक टीम चीन सीमा से सटी उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी का दौरा करने जा रही है। डॉ.नेगी के अनुसार यह टीम 14 से 16 अक्टूबर तक इस घाटी के गांवों की स्थिति की जानकारी लेने के साथ ही ग्रामीणों से विमर्श भी करेगी। इसके तहत लोगों से विकास और आजीविका से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा होगी। 
उन्होंने बताया कि चीन सीमा से सटे अन्य गांवों के बारे में भी ब्योरा जुटाया जा रहा है। इसके बाद समग्र कार्ययोजना तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। फिर सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद को भेजेगी। कार्ययोजना के मुख्य बिंदु चीन सीमा से सटे गांवों में सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ ही रोजगार सृजन जैसे बिंदु वहां की कार्ययोजना में शामिल किए जाएंगे।

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