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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 07, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चमोली: ऋषि गंगा में आई आपदा को हुए एक साल, मचाई थी भारी तबाही; आज भी हरे हैं इसके घाव

By Sunil NegiEdited By:
Published: Mon, 07 Feb 2022 07:00 PM (IST)

चमोली जनपद के जोशीमठ में आज से एक साल पहले सात फरवरी को ही ऋषि गंगा में आपदा आई थी। ...और पढ़ें

जोशीमठ में तपोवन विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना के डाईवर्जन साइड पर आपदा के दौरान धौली गंगा उफान पर। फाइल फोटो
जोशीमठ में तपोवन विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना के डाईवर्जन साइड पर आपदा के दौरान धौली गंगा उफान पर। फाइल फोटो

संवाद सहयोगी, गोपेश्वर। जोशीमठ ऋषि गंगा में आई आपदा को एक साल हो गए है। इस आपदा ने भारी से भारी तबाही मचाई थी, जिसके घाव आज भी हरे है। प्रभावित ग्रामीणों को आज भी मदद की दरकार है। अभी भी इस तबाही में लापता हैं। क्षेत्र में पुल, पैदल रास्ते व रैणी गांव के विस्थापन सहित नदी किनारे सुरक्षा उपाय किए जाने शेष हैं।

ऋशि गंगा जल विद्वुत परियोजना का मिट गया था नामोनिशान

बीते वर्ष सात फरवरी सुबह आई इस आपदा ने उत्तराखंड ही नही देश को भी हिला कर रख दिया था। आज भी इस आपदा की याद आती है तो आपदा प्रभावितों सहित प्रत्यक्षदर्शियों की रूह कांप जाती है। कैसे चटख धूप साफ सुहावने मौसम में प्रकृति का खौफनाक चेहरा सामने आया, ऋषि गंगा में रैंठी ग्लेशियर टूटने से जल प्रलय ने तबाही मचाई थी। 13 मेगावाट की ऋशि गंगा जल विद्वुत परियोजना का नामोनिशान भी मिट गया था। जबकि सरकार ने आपदा में 206 लोगों को मृत्यु प्रमाण पत्र दिए के साथ आश्रितों को मुआवजा भी दिया गया है। 88 शव भी बरामद हुए हैं, लेकिन अभी भी 117 लापता लोगों का पता नहीं है। हालांकि, अभी तक 38 मानव अंग बरामद हुए थे। 52 शवों व एक मानव अंग की शिनाख्त हुई थी।

परियोजना के कई भवन, मशीनें सब चढ़ गए थे मलवे की भेंट

रैंणी वल्ली, पल्ली, पैंग मुरंडा, जुवाग्वाड, जुगजू, सुभांई, तपोवन, ढाक, बडागांव सहित तपोवन जल विद्युत परियोजना के बैराज और टनल में मलबा घुस गया। साथ ही परियोजना के कई भवन, मशीनें सब मलवे की भेंट चढ़ गई। रैंणी में बीआरओ का हेवी मोटेबल पुल, रैंणी पल्ली और जुगजू को जोड़ने वाला पुल, जोंज के अतिरिक्त तपोवन भंग्यूल को जोड़ने वाला पुल बह गया। जिस कारण से महीनों तक ग्रामीण मुख्य धारा से कटे रहे।

इस आपदा में 206 लोग हो गए थे लापता

इस आपदा में 206 लोग लापता हो गए थे। अभी तक 135 शव और मानव अंग बरामद हुए थे। लेकिन अभी तक भी रैणी क्षेत्र में आपदा के जख्म हरे हैं। आपदा के बाद से रैणी में लगातार भू कटाव बढ़ रहा है। यहां तक की बार्डर हाईवे भी लगातार धस रहा है। जिस कारण ग्रामीण परेशान हैं। हाईवे का स्थाई ट्रीटमैंट अभी तक नही हो पाया है। गांव में दरारें भी बढ़ रही है। धौली गंगा पर चार पैदल पुल बहने के बाद आज भी पुलों का निर्माण नहीं हो पाया। ग्रामीणों के लिए लगाई गई ट्राली भी परेशानी का सबब बनी हुई है। मलारी हाईवे रैणी में आज भी वैली ब्रिज से ही आवाजाही हो रही है। स्थाई पुल निर्माण न होने से नीती घाटी निवासियों में आक्रोश है।

रैणी गांव के ग्राम प्रधान भवान सिंह राणा और पल्ला रैणी की प्रधान शोभा राणा, सरपंच संग्राम सिंह कहते हैं कि रैंणी, पैंग, मुरंडा, जुगजू, जुवाग्वाड, बनचुरा आदि के पैदल रास्ते अभी भी क्षतिग्रस्त पड़े हैं। ऋषि गंगा नदी के साथ ही धौली नदी के किनारे बाढ़ सुरक्षा कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका है। नगर पालिका जोशीमठ के अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार कहते हैं कि जोशीमठ पालिका अंतर्गत प्रथम प्रयाग विष्णू प्रयाग व इसका झूला पुल भी इस आपदा की भेंट चढ़ गया था। आज भी पहला प्रयाग बदहाल है।

तपोवन विष्णुगाड़ जल विद्वुत परियोजना का पुन: निर्माण कार्य शुरू

एनटीपीसी की तपोवन विष्णुगाड़ जल विद्वुत परियोजना का पुन: निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यहां पर आज भी शवों के मिलने का सिलसिला जारी है। परियोजना के अधिकारियों का दावा था कि उनकों 200 करोड़ का नुकसान हुआ है। इस आपदा में 140 संविदा श्रमिकों की मौत हुई थी। उत्तराखंड के चमोली में आई प्रलयकारी आपदा के एक वर्ष पूरा होने पर एनटीपीसी के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (हाइड्रो) विनय कुमार ने आपदा में हताहत हुए श्रमिकों के श्रद्धांजलि के लिए श्रमिक स्मारक का अनावरण कर उन्हें याद किया। इस दौरान दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शांतिपाठ भी किया गया।

अनावरण के दौरान कार्यकारी निदेशक (परियोजना प्रबंधन) ओके मुरुकादास एवं परियोजना प्रमुख आरपी अहिरवार, महाप्रबंधक (परियोजना) मुकेश कुमार अग्रवाल एवं सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सभी ने एनटीपीसी द्वारा बनाए गए स्मृति स्मारक में श्रद्धासुमन अर्पित कर आपदा में दिवंगत श्रमिकों की याद में दो मिनट का मौन रखा।