जागरण संवाददाता, देहरादून: आखिरकार उत्तराखंड अधिकारी-अधिकारी समन्वय मंच को शासन ने वार्ता के लिए बुला ही लिया है। सोमवार को अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में हुई वार्ता में कई मांगों पर सहमति बनी। 22 जून को मंच ने राजधानी में आक्रोश रैली और इसी दिन बेमियादी हड़ताल का एलान करने की घोषणा की हुई है। अब इस संबंध में मंगलवार को बैठक होगी, जिसमें आंदोलन को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

मंच के प्रांतीय प्रवक्ता पूर्णानंद नौटियाल ने बताया कि अपर मुख्य सचिव ने भरोसा दिया कि सातवें वेतनमान के भत्तों के भुगतान और यू-हेल्थ स्मार्ट कार्ड सेवा के संबंध में जुलाई के प्रथम सप्ताह में होने वाली कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। सेवाकाल में न्यूनतम तीन पदोन्नति देने और पुरानी पेंशन नीति बहाल करने की मांग पर कहा कि शासन स्तर पर कार्मिकों की समस्याओं के निराकरण को समिति गठित हो चुकी है। समिति की रिपोर्ट के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। मंच ने मांग की कि इंदु कुमार पांडे की अध्यक्षता में गठित वेतन समिति ने जो संस्तुति की हैं, उनका संज्ञान न लिया जाए। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि समिति ने कार्मिकों की सुविधाओं में कटौती के जो प्रस्ताव दिए थे, उन्हें कैबिनेट स्थगित कर चुकी है। सेवानिवृत्ति के अंतिम वर्ष में स्वेच्छा के आधार पर स्थानांतरण करने की मुद्दे पर कहा कि इस प्रस्ताव को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति के सम्मुख रखा जाएगा। अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण की पूर्ववर्ती व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव आगामी कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। मंच के प्रवक्ता ने कहा कि सोमवार रात या मंगलवार सुबह तक वार्ता का कार्यवृत्त जारी हो जाएगा। सभी बिंदुओं को मंच के संयोजक मंडल के समक्ष रखेंगे और फिर आंदोलन के संबंध में आम सहमति से फैसला होगा। वार्ता में सचिव वित्त अमित नेगी, प्रमुख सचिव न्याय मीना तिवारी, मंच के मुख्य संयोजक नवीन कांडपाल, हरीश नौटियाल, रमेश रमोला, पंचम सिंह बिष्ट, प्रताप सिंह पंवार, बीएस पयाल, मुकेश बहुगुणा, सुभाष रतूड़ी, अनंत राम शर्मा, लोकेंद्र पैन्यूली, संदीप कुमार मौर्य, विक्रम नेगी आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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