तो क्या खत्म हो जाएगा उत्तराखंड के मिनी मालदीव का अस्तित्व? एनजीटी के हाथ में फैसला
एनजीटी ने टिहरी झील में तैरते होटल ले राय फ्लोटिंग हट्स के संचालन पर अंतिम निर्णय लेने से पहले ईंधन ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अंकुर अग्रवाल, देहरादून। टिहरी झील में पानी के ऊपर संचालित होटल ले राय फ्लोटिंग हट्स एंड इको रूम्स का भविष्य अब सिर्फ कुछ पर्यावरणीय शर्तें पूरी करने से तय नहीं होगा।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने स्पष्ट कर दिया है कि संचालन की अनुमति पर अंतिम निर्णय लेने से पहले ईंधन से होने वाले प्रदूषण, खाना पकाने व खाद्य पदार्थों के उपयोग से निकलने वाले अपशिष्ट व उसके जलाशय में पहुंचने की आशंका तक का आकलन करना होगा।
अधिकरण ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को इन सभी पहलुओं पर विचार कर कारणयुक्त निर्णय लेने और तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि टिहरी जिला गंगा समिति ने फ्लोटिंग हट के संचालन की अनुमति की सिफारिश की है और राज्य गंगा समिति ने भी इसे कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दे दी है। एनजीटी ने हालांकि इन शर्तों को पर्याप्त नहीं माना है। अधिकरण ने पाया कि शर्तों में यह स्पष्ट ही नहीं है कि फ्लोटिंग हट में किस प्रकार का ईंधन इस्तेमाल होगा और उससे कितना प्रदूषण हो सकता है। इसी तरह खाना पकाने व खाद्य पदार्थों के उपयोग से पैदा होने वाले प्रदूषण एवं उसके बाद जलाशय में होने वाले संभावित बहाव का भी पर्याप्त आकलन नहीं किया गया।
एनजीटी ने अपने आदेश में भोपाल स्थित केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ के उस मामले का भी जिक्र किया, जिसमें डीजल ईंधन संचालित क्रूज पर रोक लगाई गई थी। इसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव व विशेषज्ञ सदस्य डा. अफरोज अहमद की प्रधान पीठ ने संकेत दिया है कि टिहरी मामले में निर्णय लेते समय इस मिसाल समेत सभी प्रासंगिक पहलुओं को ध्यान में रखना होगा।
पहले अनुमति जरूरी, बिना मंजूरी चला तो तत्काल कार्रवाई
एनजीटी ने इससे पहले भी इस गतिविधि को गंगा प्राधिकरण आदेश, 2016 के प्रविधानों के दायरे में माना था। एनएमसीजी ने अपनी 14 जून 2024 की रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि फ्लोटिंग होटल का संचालन उक्त आदेश के अंतर्गत आता है व इसके लिए एनएमसीजी की अनुमति आवश्यक है।
अब अधिकरण ने एनएमसीजी को निर्देश दिया है कि सभी प्रासंगिक पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखकर कारणयुक्त निर्णय लिया जाए। खास बात ये है कि यदि फ्लोटिंग हट एनएमसीजी की अनुमति के बिना संचालित पाया जाता है तो तत्काल निवारक कार्रवाई की जाएगी। यानी राज्य स्तर की सिफारिश अपने आप में संचालन की अंतिम हरी झंडी नहीं है।
झील में सीवेज-कचरा नहीं, प्रवाह भी बाधित न हो
राज्य गंगा समिति की सिफारिश में भी फ्लोटिंग होटल के संचालन के लिए कड़े पर्यावरणीय प्रविधान रखे गए हैं। टिहरी जलाशय में किसी भी तरह का प्रदूषित पानी, सीवेज या कचरा नहीं छोड़ा जाएगा। जलाशय के प्राकृतिक प्रवाह व उसकी जलविज्ञानी व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। परिसर में एकल उपयोग वाली प्लास्टिक पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी व एनएमसीजी, राज्य गंगा समिति तथा केंद्र और राज्य सरकार के लागू पर्यावरणीय कानूनों व दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
