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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 30, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उत्तराखंड में नए साल में सुलझेगा शिक्षकों की वरिष्ठता का मसला, लंबे अरसे से चला आ रहा विवाद

By Raksha PanthariEdited By:
Published: Wed, 30 Dec 2020 10:29 AM (IST)

उत्तराखंड में लंबे अरसे से चल रहा शिक्षकों की वरिष्ठता का विवाद नए साल में सुलझने के आसार हैं। तदर्थ ...और पढ़ें

उत्तराखंड में नए साल में सुलझेगा शिक्षकों की वरिष्ठता का मसला।
उत्तराखंड में नए साल में सुलझेगा शिक्षकों की वरिष्ठता का मसला।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में लंबे अरसे से चल रहा शिक्षकों की वरिष्ठता का विवाद नए साल में सुलझने के आसार हैं। तदर्थ विनियमित और सीधी भर्ती से नियुक्त शिक्षकों के बीच वरिष्ठता पर शासन के फैसले पर पब्लिक सर्विस ट्रिब्यूनल की निगाहें भी टिकी हैं। ट्रिब्यूनल की ओर से भी शासन को इस मामले में निर्णय लेने को कहा गया है। शासन ने शिक्षकों के दोनों पक्षों के बीच वरिष्ठता को लेकर विवाद की सुनवाई प्रारंभ कर दी है। 

शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने प्रभावित पक्षों की सुनवाई करने के निर्देश दिए थे। शिक्षकों के दोनों ही पक्षों ने शिक्षा निदेशक के माध्यम से अपने प्रत्यावेदन शासन को भेज दिए हैं। शिक्षकों के दोनों पक्षों को विस्तार से जानने के बाद कार्मिक, न्याय और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सचिव के निर्देश पर शिक्षकों से मिले प्रत्यावेदन के आधार पर शिक्षा निदेशक विस्तृत प्रस्तुतीकरण तैयार करेंगे।

गौरतलब है कि तदर्थ विनियमित शिक्षकों को हाईकोर्ट ने एक अक्टूबर 1990 से विनियमित मानते हुए वरिष्ठता निर्धारित करने के आदेश दिए हैं। उत्तर प्रदेश में तदर्थ शिक्षकों को वर्ष 1995 में विनियमित किया गया था। उत्तराखंड में कार्यरत शिक्षकों को 1999 और फिर 2002 में विनियमित किया गया। तदर्थ विनियमित शिक्षकों ने 1990 से वरिष्ठता की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

हाईकोर्ट ने इन शिक्षकों को वरिष्ठता देने के मामले में प्रभावित पक्षों की सुनवाई करने को भी कहा है। शिक्षकों का एक पक्ष इस मामले में पब्लिक सर्विस ट्रिब्यूनल में भी गया हुआ है। ट्रिब्यूनल ने भी हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक शासन को इस मसले को सुलझाने को कहा है।

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