जागरण संवाददाता, देहरादून। नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे (एनएचएफएस)-5 के आंकड़े उम्मीद जगा रहे हैं। उत्तराखंड में न केवल बाल लिंगानुपात में सुधार हुआ है, बल्कि संस्थागत प्रसव का ग्राफ भी बढ़ा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में स्वास्थ्य की स्थिति पर एनएचएफएस-5 की रिपोर्ट जारी की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य की मिशन निदेशक सोनिका ने बताया कि उत्तराखंड में बाल लिंगानुपात में सुधार हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार अब उत्तराखंड में 1000 बालकों पर 984 बालिकाओं का जन्म हो रहा है, जबकि एनएचएफएस-4 (2015-16) के अनुसार यह आंकड़ा 1000 बालकों पर 888 बालिकाओं का था। मिशन निदेशक ने बताया कि यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन है, जो मां के गर्भ में भ्रूण के लिंग परीक्षण की कुप्रवृत्ति में कमी को दर्शाता है। यह निश्चित ही बालिकाओं के चहुंमुखी विकास के लिए यह एक सराहनीय पहल है।

उन्होंने बताया कि राज्य में संस्थागत प्रसव के स्तर में भी सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने का प्रतिशत भी गत वर्षों की तुलना में बेहतर हुआ है, जिसके अनुसार अब 83.20 प्रतिशत प्रसव सरकारी अस्पतालों में होने लगे है। जबकि पहले यह आंकड़ा 68.6 प्रतिशत था। मिशन निदेशक ने संस्थागत प्रसव में सुधार के लिए अस्पतालों में सुविधाओं के विकास एवं विस्तार को कारण बताया, जिसके अंतर्गत महिला चिकित्सकों की तैनाती व प्रसव सेवाओं में सुधार प्रमुख हैं।

एनएचएम निदेशक डा. सरोज नैथानी ने स्वास्थ्य सूचकांक में सुधार को प्रभावी कार्ययोजना का परिणाम बताया। डा. नैथानी ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार टीकाकरण के स्तर में भी सुधार दिखा है। टीकाकरण का स्तर 57.60 प्रतिशत से बढ़कर 80.80 प्रतिशत हो गया है। 40.28 प्रतिशत का उछाल निश्चित तौर पर टीकाकरण की सेवाओं में गुणात्मक परिवर्तन और सुधार को दर्शाता है। इसके अलावा गर्भावस्था की प्रथम तिमाही में जांच कराने वाली महिलाओं का भी प्रतिशत बढ़ा है। वहीं, प्रसव उपरांत चिकित्सीय देखरेख की स्थिति भी अब बेहतर हुई है।

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Edited By: Raksha Panthri