जागरण संवाददाता, देहरादून : राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने शासकीय व अशासकीय महाविद्यालयों में यूजीसी रेगुलेशन-2010 व 2018 के तहत पदोन्नति पर लगी अघोषित रोक हटाने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत, अपर मुख्य सचिव व निदेशक को पत्र भेजा है।

महासंघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष डा. प्रशांत सिंह ने बताया कि उच्च शिक्षा निदेशक के 24 मार्च, 2021 के आदेशानुसार पदोन्नतियों पर यह रोक लगाई गई थी।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, गढ़वाल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तमाम प्रत्यावेदन व संयुक्त मांगपत्र पर भी इस आदेश को वापस लेने की कार्रवाई नहीं की है। इसी बीच हरिद्वार के एक महाविद्यालय ने उच्च न्यायालय में वाद दायर कर दिया। जिसमें कोर्ट ने उक्त आदेश को निरस्त कर दिया। पर विभाग ने न्यायालय के आदेश पर अमल करने में 27 दिन का वक्त लगा दिया। 29 जुलाई, 2021 को इस विषय में आदेश जारी किया गया। पर यूजीसी रेगुलेशन-2010 से संबंधित जिन पदोन्नतियों की अंतिम अवधि 17 जुलाई, 2021 थी, उसका आदेश में कोई उल्लेख नहीं था।

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महासंघ की मांग है कि 17 जुलाई, 2021 तक या इससे पहले जिन शिक्षकों ने अपनी पदोन्नति के संबंध में प्रपत्र जमा करा दिए थे, उन्हें पदोन्नति के अवसर प्रदान किए जाएं। उन्होंने बताया कि जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय व देश के अनेक विश्वविद्यालयों में 17 जुलाई, 2021 के बाद भी यूजीसी रेगुलेशन-2010 के तहत उक्त अवधि से पहले के पदोन्नति प्रकरणों पर भी कार्रवाई चल रही है। ऐसे में एक जनवरी, 2006 से 17 जुलाई, 2021 तक की अवधि के लंबित पदोन्नति प्रकरणों पर शिक्षक हित में निर्णय लिया जाए।

उच्च शिक्षा विभाग के 29 जुलाई, 2021 के आदेश में कहा गया था कि यूजीसी रेगुलेशन-2018 के तहत पदोन्नति प्रकरणों के लिए दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे। पर चार माह बाद भी कोई निर्देश जारी नहीं किए गए। 25 अक्टूबर, 2021 को यूजीसी रेगुलेशन-2018 के प्राव‍िधानों के अनुसार करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोन्नति के लिए 'छानबीन सह मूल्यांकन समिति' में संशोधन के संबंध में शासनादेश जारी किया गया। इसे लागू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने अभी तक कोई आदेश नहीं किया है।

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Edited By: Sumit Kumar