हिमालय की चट्टानों में कैद है प्राचीन धरती का इतिहास, मसूरी की पहाड़ियों में मिले 69 करोड़ साल पुराने हिमयुग के निशान
उत्तराखंड के मसूरी और हिमाचल के सोलन में ब्लेनी फार्मेशन की चट्टानों में 69 करोड़ वर्ष पुराने हिमयुग के संकेत ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
मसूरी-सोलन में ब्लेनी फार्मेशन की चट्टानों में हिमयुग के संकेत।
69 करोड़ वर्ष पुराने हिमयुग के प्रमाण मिले।
प्राचीन जलवायु और ग्लेशियर गतिविधियों को समझने में सहायक।
सुमन सेमवाल, देहरादून। आज जहां हिमालय की पहाड़ियों पर ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पीछे हट रहे हैं, वहीं इन्हीं पहाड़ों की प्राचीन चट्टानें उस दौर की कहानी समेटे हैं, जब धरती बर्फ से ढकी थी। उत्तराखंड के मसूरी क्षेत्र और हिमाचल प्रदेश के सोलन तक फैली ब्लेनी फार्मेशन की चट्टानों में लगभग 69 करोड़ वर्ष पुराने हिमयुग के जीते जागते संकेत मिले हैं। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डा. मनीष मेहता ने फील्ड अध्ययन के दौरान चट्टानों की प्रकृति से पर्दा उठाया है।
1864 में पहली बार हुआ था वर्णन
वाडिया संस्थान के विज्ञानी डा. मेहता के अनुसार ब्लेनी फार्मेशन को पहले ब्लेनी बोल्डर बेड के नाम से जाना जाता था। भूविज्ञानी एचबी मेडलिकाट ने वर्ष 1864 में हिमाचल प्रदेश के सोलन के निकट बालियाना नदी के आसपास इसकी चट्टानों का वर्णन किया था। इसके बाद लेसर हिमालय के विभिन्न हिस्सों में इस तरह की चट्टानों के अध्ययन से हिमालय के प्राचीन भूविज्ञान के इतिहास को समझने में मदद मिली। उत्तराखंड के मसूरी क्षेत्र में भी इसके शैल समूह के महत्वपूर्ण उदाहरण पाए जाने से अध्ययन को और विस्तार मिलेगा।
चट्टानों में इस तरह कैद है ग्लेशियर की कहानी
ब्लेनी फार्मेशन में कंकड़, बड़े गोलाकार पत्थर और महीन अवसाद एक साथ मिले हुए दिखाई देते हैं। ऐसी चट्टानों को भूविज्ञान में कांग्लोमरेट कहा जाता है। यदि इनका निर्माण हिमनदों द्वारा लाए गए और जमा किए गए मलबे से हुआ हो, तो ये प्राचीन हिमनदीय निक्षेप के प्रमाण हो सकते हैं। ग्लेशियर अपने साथ चट्टानों के टुकड़े और मिट्टी लेकर चलते हैं। बर्फ पिघलने या पीछे हटने पर यह सामग्री जमा हो जाती है। लाखों वर्षों में दबाव और खनिजों के सीमेंटेशन से यही ढीला निक्षेप ठोस चट्टान में बदल सकता है।
हिमालय केवल युवा पर्वत नहीं, प्राचीन धरती का अभिलेख भी है
विज्ञानियों के अनुसार ब्लेनी फार्मेशन की अहमियत इस बात में है कि यह हिमालय के निर्माण से पहले की धरती, प्राचीन जलवायु और हिमनदों की गतिविधियों को समझने का अवसर देती है। आज के ग्लेशियरों में हो रहे बदलावों को समझने के लिए भी धरती के पुराने हिमाच्छादन का अध्ययन उपयोगी है।
