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देहरादून में मां के संघर्ष को मिला न्याय: बेटे की मौत मामले में पुलिस की FR खारिज, दोबारा होगी जांच

Published: Fri, 01 May 2026 10:07 PM (IST)

देहरादून में एक मां को अपने बेटे की मौत के मामले में न्याय मिला है। कोर्ट ने पुलिस की अंतिम ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

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जागरण संवाददाता, देहरादून। मां के संघर्ष को आखिरकार न्याय मिल ही गया। लंबे समय से बेटे के मामले में न्याय की गुहार लगा रही महिला को अदालत से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने पुलिस की ओर से लगाई गई अंतिम रिपोर्ट (एफआर) को खारिज करते हुए मामले की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

इस फैसले के बाद न केवल केस दोबारा खुल गया है, बल्कि जांच अधिकारी की कार्यशैली भी जांच के घेरे में आ गई है। कोर्ट ने एसएसपी को पत्र लिखकर विवेचक उपनिरीक्षक अमित कुमार शर्मा के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने को कहा है।

सहस्रधारा निवासी ललिता चौधरी ने न्यायालय चतुर्थ अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट साहिस्ता बानो की अदालत में अपने अधिवक्ता के माध्यम से प्रार्थनापत्र दिया कि उनका बेटा क्षितिज अपने पैरों में खड़ा होना चाहता था।

16 फरवरी 2024 को काम के सिलसिले में प्रेमनगर गया था, जहां डंपर ने उसे कुचल दिया और फरार हो गया। उनका बेटा 45 मिनट तक सड़क पर तड़पता रहा। अज्ञात व्यक्ति ने कंट्रोल रूम में सूचना दी, लेकिन कोई मदद को नहीं आया।

कुछ देर बाद वहां एंबुलेंस आई, जिससे उनके बेटे को अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद बेटे को एम्स रेफर किया गया, जहां चिकित्सक ने बेटे का एक पांव काट दिया। 17 फरवरी को क्षितिज की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।

महिला ने बताया कि कुछ लोग प्रेमनगर थाना पहुंचे और शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। 19 फरवरी को वह स्वयं थाने पहुंची तब जाकर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।

21 फरवरी को उन्होंने जांच अधिकारी को फोन किया और कहा कि आपने अज्ञात डंपर का नंबर नहीं दिया तो जांच अधिकारी बोला कि मेरे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है जो मैं इतनी जल्दी कार्रवाई करूं।

27 फरवरी से उन्होंने सड़कों पर जाकर सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। करीब डेढ़ वर्ष तक सड़कों पर अज्ञात वाहन को ढूंढती रही, जिसके बाद उन्हें सफलता मिली।

उन्होंने संदिग्ध डंपर का नंबर व चालक का नाम एसएसपी को दिया। इसलिए विवेचना अधिकारी की ओर से प्रेषित अंतिम रिपोर्ट को अस्वीकार कर पुन: विवेचना कराई जाए।

अदालत ने वादी ललिता चौधरी की ओर से प्रस्तुत आपत्ति याचिका को स्वीकार कर दिया और विवेचक उपनिरीक्षक अमित कुमार शर्मा की ओर से प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर दिया है।

प्रभारी निरीक्षक प्रेमनगर कोतवाली को आदेशित किया है कि वह प्रस्तुत मामले में स्वयं व अपने अधीनस्थ सक्षम अधिकारी से दोबारा जांच करवाएं। इसके साथ ही आदेश की एक प्रति एसएसपी को भेजते हुए विवेचक पर कार्रवाई करने के आदेश जारी किए गए हैं।

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