जागरण संवाददाता, देहरादून। महिला से दुष्कर्म और उनकी बेटी का जैविक पिता होने के आरोप में फंसे द्वाराहाट के विधायक महेश नेगी को सीजेएम कोर्ट से पांच मई तक डीएनए टेस्ट के लिए राहत मिल गई है। शुक्रवार को विधायक को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन उनके अधिवक्ता हाईकोर्ट से मिले स्टे ऑर्डर लेकर सीजेएम कोर्ट पहुंचे, जहां कोर्ट ने विधायक को पांच मई को पेश होने के आदेश जारी किए।

विधायक के अधिवक्ता राजेंद्र कौठियाल व आरएस भट्ट ने बताया कि डीएनए टेस्ट के मामले में हाईकोर्ट की ओर से अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी गई है। वहीं, हाईकोर्ट ने सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है कि किस आधार पर विधायक का डीएनए टेस्ट लिया जाना है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट को दी एप्लीकेशन में उन्होंने कहा है कि महिला विधायक को ब्लैकमेल कर रही है। महिला शादी से लेकर बच्ची पैदा होने तक अपने पति के साथ रही। 

शामली के जिस सरकारी अस्पताल में महिला ने बच्ची को जन्म दिया, वहां बच्ची के पिता के तौर पर अपने पति का नाम लिखवाया हुआ है। ऐसे में डीएनए टेस्ट का सवाल ही पैदा नहीं होता। इतना ही नहीं महिला बालिग है और स्वेच्छा से ही विधायक के साथ इधर-उधर गई है। ऐसे में महिला गलत तथ्य पेश कर विधायक पर दुष्कर्म का आरोप लगा रही है। महिला ने पहले कहा कि उसने शामली के एक अस्पताल से अपनी बच्ची व पति का डीएनए टेस्ट करवाया, लेकिन जब अस्पताल से डीएनए के संबंध में पूछा जाता है तो अस्पताल डीएनए टेस्ट करवाने से मना कर देता है। 

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