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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 27, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हरिद्वार में दरिंदगी का शिकार हुई बेटी को एक साल बाद मिला इंसाफ, नौ साल की बच्‍ची को दुष्‍कर्म के बाद दी थी दर्दनाक मौत

By Nirmala BohraEdited By:
Published: Sun, 27 Mar 2022 09:54 AM (IST)

ऋषिकुल में दरिंदगी का शिकार हुई हरिद्वार की बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए पूरा शहर सड़कों पर उतर आया ...और पढ़ें

दुष्कर्म के बाद रस्सी से गला घोंट कर की गई थी हत्या
दुष्कर्म के बाद रस्सी से गला घोंट कर की गई थी हत्या

मेहताब आलम, हरिद्वार : ऋषिकुल क्षेत्र में दरिंदगी का शिकार हुई हरिद्वार की बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए पूरा शहर सड़कों पर उतर आया था। मुख्य अभियुक्त रामतीर्थ के फरार मामा राजीव की गिरफ्तारी होने तक रोजाना अलग-अलग संगठनों के बैनर तले विरोध-प्रदर्शन होते रहे।

पुलिस को गिरफ्तारी और ला एंड आर्डर दो-दो मोर्चे पर जूझना पड़ रहा था। जनाक्रोश को देखते हुए राजीव की गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

कई बार जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किए

ऋषिकुल क्षेत्र में बच्ची से दरिंदगी की खबर पूरे शहर में जंगल की आग की तरह फैल गई थी, जिसके बाद शहर भर से लोग ऋषिकुल पहुंच गए। चूंकि घटना पड़ोस के घर में हुई थी, इसलिए गुस्साई भीड़ ने राजीव के घर को भी निशाना बनाते हुए आग तक लगाने का प्रयास किया। कई बार जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किए।

कैंडल मार्च में महिलाओं, युवतियों और बच्चों के रूप में संवेदनाओं का सैलाब सड़क पर उतर आया था। उग्र प्रदर्शन होने पर तत्कालीन एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय के नेतृत्व में शहर भर की टीम को मोर्चा संभालना पड़ा था।

अच्छी बात यह रही कि बच्ची की लापता होने की सूचना पर तत्कालीन मायापुर चौकी प्रभारी संजीत कंडारी ने समय रहते तत्परता दिखाते हुए बच्ची की खोजबीन शुरू कर दी थी और मुख्य आरोपित से पूछताछ के बाद बच्ची का शव बरामद कर लिया था। पुलिस जरा भी देर करती तो रामतीर्थ बच्ची के शव को ठिकाने लगा चुका होता। फिर शायद ही कभी इस केस की गुत्थी सुलझ पाती।

एएसपी डा. विशाखा अशोक भड़ाने और तत्कालीन शहर कोतवाल अमरजीत सिंह की भूमिका भी अहम रही थी। दरअसल, इस मामले में मुख्य आरोपित को तो मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि उसका मामा राजीव फरार हो गया था।

लगातार विरोध प्रदर्शन और एक लाख रुपये का इनाम घोषित होने पर सीओ अभय प्रताप सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने कड़ी मशक्कत व जद्दोजहद के बाद उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से राजीव की गिरफ्तारी की थी। तब कहीं जाकर शहरवासियों का आक्रोश शांत हुआ था।

डीआइजी नीरू गर्ग ने किया था कैंप

शहर के माहौल को देखते हुए तत्कालीन डीआइजी गढ़वाल नीरू गर्ग को हरिद्वार आना पड़ा। उन्होंने कई दिन हरिद्वार में ही कैंप करते हुए पुलिस टीमों को दिशा-निर्देश दिए।

उस समय सीओ श्यामपुर रहते हुए तत्कालीन एसएसपी सेंथिल अबूदइ कृष्णराज एस के निर्देशन में हुई विभागीय कार्रवाई का हिस्सा रहे रिटायर्ड पुलिस उपाधीक्षक संजय विश्नोई उस दिन को याद करते हुए बताते हैं कि आमजन में जबरदस्त आक्रोश था।

सड़क पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन करने वालों को समझाना बहुत मुश्किल था। लेकिन आला अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस ने टीम के रूप में कार्य करते हुए न सिर्फ आरोपितों को गिरफ्तार किया, बल्कि कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए भी पूरी ताकत लगाई।

फांसी की सजा पर परिवार ने जताया संतोष

घटना के बाद मासूम का परिवार और शहर के लोग फांसी की मांग करते आ रहे थे। उस समय विरोध प्रदर्शनों के अलावा दुखी स्वजन को सांत्वना देने के दौरान अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने भी एकमात्र यही मांग रखी गई थी।

कोर्ट का फैसला आने पर मुख्य अभियुक्त रामतीर्थ को फांसी की सजा सुनाए जाने पर परिवार ने संतोष व्यक्त किया है। स्थानीय निवासियों ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। हालांकि स्वजन का मानना है कि उसके मामा राजीव की भूमिका भी गंभीर थी, उसे भी और सजा मिलनी चाहिए थी।

दुष्कर्म के बाद रस्सी से गला घोंट कर की थी हत्या

20 दिसंबर, 2020 को नौ वर्षीय बालिका अपराह्न करीब साढ़े तीन बजे अपने घर की छत पर पतंग उड़ा रही थी। इसी दौरान ऋषिकुल कालोनी में रह रहे रामतीर्थ यादव ने पतंग दिलाने के बहाने उसे अपने घर बुलाया। मां को यह बात बताकर बच्ची घर से निकली, लेकिन उसके बाद लौटी नहीं।

कुछ देर बाद बच्ची का शव पास की कालोनी में रामतीर्थ यादव के मामा राजीव के मकान की छत पर बने गोदाम में सामान के बीच पड़ा मिला। बच्ची की दुष्कर्म के बाद रस्सी से गला घोंट कर हत्या की गई थी।

दुष्कर्म के बाद हत्या में अभियुक्त को फांसी

नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म के बाद हत्या करने के मामले में अदालत ने मुख्य अभियुक्त को फांसी की सजा और एक लाख 30 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया है। सह अभियुक्त को साक्ष्य छिपाने का दोषी करार देते हुए पांच वर्ष की कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।

तीसरे अभियुक्त को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। तीनों ही मूल रूप से सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश निवासी हैं। सजा पाने वाले अभियुक्त मामा-भांजा हैं। वहीं फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 12 महीने के भीतर दोषियों को सजा सुना दी है।

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