देहरादून, जेएनएन: प्रदेश में सगंध (एरोमैटिक) खेती को बढ़ावा देने में जुटा सगंध पौधा केंद्र (कैप), सेलाकुई अब देहरादून शहर के बच्चों को भी सगंध पौधों और इनके महत्व से रूबरू कराएगा। 'दैनिक जागरण' के 'माय सिटी माय प्राइड' महाभियान के दौरान बनी सहमति के आधार पर कैप ने दून की विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में सगंध और औषधीय महत्व के पौधे लगाने व इनके बारे में जानकारी देने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण को विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करने का निश्चय किया है। 

देश-दुनिया में आज एरोमैटिक प्लांट पर पूरा जोर है। यही कारण भी है कि दुनिया में एरोमा सेक्टर एक बड़े उद्योग के रूप में उभरा है। इस लिहाज से देखें तो उत्तराखंड में सगंध खेती की अपार संभावनाएं हैं। और इस दिशा में सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र लगातार प्रयासरत है। यह उसकी मेहनत का ही नतीजा है कि वर्तमान में लगभग 18000 किसान सगंध पौधों की खेती से जुड़े हैं। अब ये सगंध पौधे हैं क्या? इसे लेकर हर किसी की जिज्ञासा होती है। असल में सगंध पौधों से हम अक्सर रूबरू होते हैं, लेकिन इनके बारे में जानकारी नहीं रखते।

फिर चाहे वह तुलसी का पौधा हो या फिर लैमनग्रास, स्टीविया अथवा अन्य पौधे। ऐसे में जरूरी है कि स्कूली बच्चे भी इनके बारे में न सिर्फ जानकारी लें, बल्कि संरक्षण की दिशा में जनसामान्य को प्रेरित भी करें।
'माय सिटी माय प्राइड' महाभियान के दौरान भी स्कूली बच्चों को सगंध पौधों के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया गया था। इस पर सगंध पौधा केंद्र के निदेशक नृपेंद्र चौहान ने सहमति जताई। उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत शहर के 10 विद्यालयों में न सिर्फ सगंध पौधे लगाए जाएंगे, बल्कि इनके महत्व के बारे में भी बताया जाएगा। साथ ही बच्चों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया जाएगा।

By Krishan Kumar