गति जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके बिना जीवन शून्य है। लिहाजा, सभी कुछ गतिमान रहना चाहिए और तभी आगे भी बढ़ा जा सकता है। कुछ ऐसा ही मकसद है। उत्तराखंड के नीति एवं शोध आधारित थिंक टैंक 'गति फाउंडेशन' का। उसके शोध मुख्य रूप से इस हिमालयी राज्य और उसके निवासियों पर केंद्रित हैं। फिर चाहे वह शहरी क्षेत्र के मुद्दे हों या फिर सुदूर अंचलों के, सभी में गति फाउंडेशन ने नई राह दिखाने की कोशिश की है।

अर्बन गवर्नेंस, नीति, नियम, पर्यावरण, शहरीकरण, जन स्वास्थ्य, पर्वतीय क्षेत्रों का विकास जैसे तमाम मसलों को लेकर यह फाउंडेशन सरकार और जनता के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। यह उसकी एक्सपर्ट और सलाहकारों की सशक्त टीम का ही नतीजा है कि बेहद कम समय में ही यह फाउंडेशन एक मजबूत थिंक टैंक के रूप में उभरकर सामने आया है।

जनभागीदारी आधारित शोध
शहर से जुड़े मसलों, चाहे वे इन्फ्रा से जुड़े हों अथवा पर्यावरण पर केंद्रित, सभी में यह फाउंडेशन जनभागीदारी आधारित शोध कर इनसे निकले निष्कर्षों को आमजन की सुविधा के लिए उपयोग में लाने का प्रयास करता है। गति फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल बताते हैं शोध आधारित इन रिपोर्ट्स को अधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों को सौंपा जाता है, ताकि वे इसके अनुरूप कार्यवाही कर सकें। इसका मकसद सावधानीपूर्वक और धरातलीय आधार पर किए जाने वाले सतत विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाना है।

दून में पहली बार मापा पीएम 2.5
वन विभाग और उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ नॉलेज पार्टनर के रूप में कार्य कर चुके गति फाउंडेशन ने इस वर्ष फरवरी में देहरादून में 10 दिन का वायु प्रदूषण मेजरमेंट अभियान चलाया। इस दौरान शहर में पहली बार पीएम 2.5 मापा गया। यही नहीं, वायु प्रदूषण के चलते उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य सबंधी समस्याओं पर गति फाउंडेशन सर्वे रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है।

फुटपाथ को लेकर चल रहा सर्वे
बेहतरीन आबोहवा की पहचान रखने वाले देहरादून शहर में वक्त के साथ फुटपाथ गायब हो गए हैं। इसे देखते हुए गति फाउंडेशन शहर में पैदल चलने वालों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर सर्वे कर रहा है। इसके नतीजे शीघ्र ही सार्वजनिक होंगे।

मसूरी में प्लास्टिक प्रदूषण पर ब्रांड ऑडिट
पहाड़ों की रानी मसूरी में बड़ी समस्या के रूप में उभरे प्लास्टिक कचरे को लेकर गति फाउंडेशन ब्रांड ऑडिट करा चुका है। यही नहीं, देहरादून से मसूरी के बीच 60 मैगी प्वाइंट्स (दुकानों) का ऑडिट भी यह फाउंडेशन करा चुका है। इससे पहले फाउंडेशन ने हिमालयी क्षेत्र में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या पर 285 ट्रैकर्स के साथ सर्वे भी किया।

शहरीकरण के मुद्दों पर फोकस
शहरी क्षेत्र की समस्याओं और उत्तराखंड समेत हिमालयी क्षेत्रों के पर्यावरण पर जनभागीदारी के साथ कार्य करने की फाउंडेशन की भविष्य की योजना है। इन मसलों पर अध्ययन के लिए गति फाउंडेशन ने जनाग्रह संस्था और इंडिया हाइक कंपनी से हाथ मिलाया है। फाउंडेशन ने देहरादून शहर की बेहतरी को इज ऑफ लिविंग के मद्देनजर सर्वे करने की भी ठानी है।

By Nandlal Sharma