अब वह वक्त करीब आता दिख रहा है, जब दून की सूरत, सेहत और स्वरूप की दिशा में सामूहिकता के साथ कदम बढ़ेंगे। आमजन से लेकर समाज के विभिन्न तबकों और क्षेत्रों से सीधा जुड़ाव रखने वाले विशेषज्ञों ने इसके लिए न केवल प्रतिबद्धता जाहिर की, बल्कि 'दैनिक जागरण' ने 'माय सिटी माय प्राइड' महाभियान के रूप में जो फोरम उपलब्ध कराया, उसे शहर हित में बेहतरीन प्रयास करार दिया।

साथ ही वादा किया कि इस महाभियान में खुद को जोड़कर शहर की तस्वीर को बदलने में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ेंगे। भविष्य की पीढ़ी के मन में न असुरक्षा की भावना हो। पढ़ने-लिखने के बाद रोजगार की चिंता न सताए। इलाज न मिलने की वजह से कोई शख्स दम न तोड़े। शहर में जीने का अंदाज बदले। सड़कों का सफर सुरक्षित हो और आमजन को मूलभूत सुविधाओं के लिए जिम्मेदारों की देहरी पर ऐड़ियां न रगड़नी पड़ें। आओ! मिलकर अपने शहर को इस मुकाम पर ले चलें। कुछ यही संकल्प लिए गए शनिवार को दैनिक जागरण कार्यालय में माय सिटी माय प्राइड महाभियान के तहत आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में।

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कॉन्फ्रेंस में महाभियान के अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिकी, ढांचागत विकास (इन्फ्रा) और सुरक्षा पिलर पर विभिन्न चरणों में पूर्व में हुए गहन विचार-विमर्श के बाद इस सामूहिक महाभियान को मुकाम तक पहुंचाने का रोडमैप भी तैयार हुआ। चुनौतियों और संभावनाओं पर खुलकर मंथन हुआ। सत्ता के नुमाइंदों ने इस राह की तमाम बाधाओं को समयबद्ध तरीके से दूर करने का इरादा जाहिर किया। परिचर्चा में सत्तारूढ़ दल के नुमाइंदे के नाते निवर्तमान महापौर और शहर विधायक विनोद चमोली ने सभी पिलर पर आए सुझावों को लेकर रोडमैप भी सुझाया।

चर्चा में देहरादून की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती, उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा, निदेशक उद्योग विभाग उत्तराखंड सुधीर चंद्र नौटियाल, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन देहरादून की पूर्व अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना, स्पेक्स संस्था के सचिव डॉ. बृजमोहन शर्मा, मनुर्भव संस्था की संस्थापक डॉ. गिरिबाला जुयाल, वाइज संस्था की सचिव डॉ. किरन नेगी, मैड संस्था के आदर्श ने भी शिरकत की। परिचर्चा में शहर से जुड़े पांचों पिलर पर तस्वीर कुछ इस तरह उभरकर सामने आई।

शिक्षा
- सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना होगा।
- शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तायुक्त शिक्षा पर फोकस करना जरूरी।
- शिक्षण संस्थाओं को सियासी छाया से दूर रखना होगा।
- निजी और सरकारी स्कूलों के बीच पाटनी होगी खाई।
- अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शिक्षा, शोध एवं विस्तार के जरिये बेहतर मैनपावर तैयार कर रोजगार के हों प्रयास।

सुधार का रोडमैप
- सबसे पहले दून के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने पर फोकस किया जाएगा।
- गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए शिक्षकों से केवल शिक्षण कार्य ही लेने और प्रॉपर मॉनीटरिंग को होंगे प्रयास। प्रशासनिक मशीनरी को जवाबदेह बनाया जाएगा।
- शिक्षा विभाग में राजनीतिक हस्तक्षेप पूरी तरह से खत्म होना चाहिए और विभाग को अपने हिसाब से चलने देना होगा।
- यदि सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होगी और गुणवत्ता भी बेहतर रहेगी तो सरकारी स्कूल भी निजी से प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।

सुरक्षा
- शहर में भूमाफिया की सक्रियता और साइबर क्राइम एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आए हैं।
- महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की रोकथाम के मद्देनजर स्कूल स्तर से ही जेंडर सेंसेटाइजेशन पर हो जोर।
- स्कूल से बच्चों को लाने के लिए अभिभावक रोजाना अपने बच्चों को पासवर्ड जरूर दें।
- अपराध नियंत्रण के मद्देनजर पूरे शहर को सीसी कैमरों की जद में लिया जाए।
- स्कूल स्तर पर काउंसिलिंग कराने के साथ ही नैतिक शिक्षा का पाठ अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाए।
- पुलिस प्रशासन नागरिकों से परस्पर संवाद कायम कर असुरक्षा के कारणों का समाधान निकाले।
- छोटी उम्र से ही बच्चों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की दिशा में उठाए जाएं कदम।

सुधार का रोडमैप
- भूमाफिया और साइबर क्राइम की चुनौती से निबटने को जागरूकता अभियान में और तेजी लाने के होंगे प्रयास।
- दून के स्कूलों में जागरूकता को लेकर शासन स्तर पर लंबित मॉड्यूल का मसला रखा जाएगा सरकार के समक्ष।
- सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने को प्रयास तो होंगे ही, एमडीडीए में प्रावधान किया जाएगा कि शहर में जो भी आवासीय और व्यवसायिक निर्माण हों, उनमें सीसी कैमरे अनिवार्य हों।
- भविष्य में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि स्कूल आवासीय क्षेत्र में न खुलें। स्कूलों के लिए कोई एक क्षेत्र चिन्हित किया जाना चाहिए।
- शहर में जो नई आवासीय कॉलोनियां अथवा व्यावसायिक परिसर अस्तित्व में आएंगे, उनमें ट्रैफिक लैंड विकसित करने के प्रावधान हो जरूरी।
- सोशल पुलिसिंग में तेजी लाने के मद्देनजर पुलिस महकमे को उठाने होंगे कदम।
- शहर की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए पुलिस कर्मियों की बढ़ानी होगी संख्या।
- ट्रैफिक समेत अन्य दिक्कतों के निदान को सिविल डिफेंस के अलावा अन्य एनजीओ से हो टाइअप।

स्वास्थ्य
- फैमिली फिजीशियन या जनरल प्रैक्टिश्नर के कांसेप्ट को वापस लाने की जरूरत।
- हेल्थ सिस्टम की मजबूती को जरूरी है कि प्राथमिक स्वास्थ्य पर फोकस किया जाए।
- दून के सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी की स्थिति में सुधार होना चाहिए।
- बीमारियों से बचाव के लिए प्रिवेंटिव हेल्थ पर देना होगा ध्यान।
- मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए हेल्थ गवर्नेंस पर फोकस करने की जरूरत।
- सस्ता व सुलभ इलाज मुहैया कराने पर हो ध्यान, जेनरिक दवाओं के लिए खुलें जनौषधि केंद्र।
- दून में सरकारी अस्पतालों की स्थिति में सुधार को कदम उठाने के साथ ही यहां जिला अस्पताल भी खुले।

सुधार का रोडमैप
- सरकारी अस्पतालों की क्वालिटी सुधरनी चाहिए और इसके लिए गंभीरता से किए जाएंगे प्रयास।
- दून अस्पताल जब से मेडिकल कॉलेज बना है, तब से दिक्कत आई। इसे देखते हुए मेहूंवाला पीएचसी को 100 बेड के अस्पताल में तब्दील करने का सरकार को दिया गया है प्रस्ताव।
- यह भी सुझाव सरकार को दिया गया कि दून मेडिकल कॉलेज के लिए या तो अलग अस्पताल बनाया जाए अथवा शहर में नया जिला अस्पताल बनाया जाए।
- शहर के चारों कोनों में बड़े सरकारी अस्पताल होने चाहिए, इसके लिए सरकार को सौंपा जाएगा प्रस्ताव।
- सरकारी और निजी अस्पतालों में समन्वय और निगरानी के मद्देनजर गठित होनी चाहिए एक कमेटी।
- स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न जांच के लिए सरकारी स्तर पर निजी और सरकारी अस्पतालों के लिए तय हो दरें।
- प्रिवेंटिव हेल्थ को लेकर जागरूकता के साथ ही पानी के नमूनों की जांच को सैंपलिंग की जाएगी तेज।

आर्थिकी
- दून में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के मद्देनजर कम से कम 100 एकड़ के लैंड बैंक का हो इंतजाम।
- उद्योगों को पावर कट न झेलना पड़े, इसके लिए हो प्रभावी व्यवस्था।
- उद्योग की मांग के अनुसार दक्ष कामगारों की कमी दूर करने को उठाए जाएं ठोस कदम। आम कागमारों की आवासीय सुविधा पर दिया जाए ध्यान।
- कौशल विकास, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, मुद्रा योजना समेत अन्य योजनाओं को ढंग से धरातल पर उतारा जाए।
- दून में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए उठाने होंगे प्रभावी कदम।

सुधार का रोडमैप
- व्यवसाय अथवा उद्यम लाभ से जुड़ा है। लिहाजा, दून में उद्यमियों के लिए भूमि समेत अन्य सुविधाएं देनी होगी। इस कड़ी में गुजरात मॉडल अपनाने का दिया गया सुझाव।
- औद्योगिक विकास के लिए 50 साला प्लान हो तैयार।
- स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के हों प्रयास।
- कृषि एवं औद्यानिकी से जुड़े उद्यमों को लेकर सरकारी प्रयासों में लाई जाए तेजी।
- कौशल विकास, स्टार्टअप जैसी योजनाओं में कौशल विकास पर किया जा रहा फोकस।
- उद्योग की मांग के अनुसार उद्योगों और शिक्षण संस्थानों में बेहतर समन्वय के होंगे प्रयास।

ढांचागत विकास (इन्फ्रा)
- दून में पेयजल की वितरण प्रणाली में खामियों को देखते हुए इसमें सुधार को उठाए जाएं कदम।
- शहर में विद्युत लाइनों को भूमिगत करने के साथ ही बंच केबल की कवायद को किया जाए तेज।
- दून की सड़कों पर वाहनों के बढ़ते दबाव के मद्देनजर फ्लाईओवर समेत अन्य विकल्पों पर दिया जाए ध्यान।
- शहर को अतिक्रमणमुक्त करने को ठोस कदम उठाने के साथ ही यह सुनिश्चित हो कि भविष्य में अतिक्रमण न होने पाए।
- विकास की दौड़ में दून में सिमटती हरियाली को बचाने के लिए फिर से प्रयास किए जाने चाहिए।

सुधार का रोडमैप
- शहर के अधिकांश हिस्से में दशकों पुरानी लाइनें हैं, जिन्हें बदलने का प्रस्ताव सरकार में है विचारधीन।
- स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में विद्युत लाइनों को भूमिगत करने का प्रस्ताव है। अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी पहल के लिए ऊर्जा निगम करे पहल।
- शहर को अतिक्रमणमुक्त करने को प्रयास चल रहे हैं। निकट भविष्य में अतिक्रमण न हो, इसके लिए तय की जाए जवाबदेही।
- सड़कों पर वाहनों के दबाव को देखते हुए फ्लाईओवर जरूरी हैं। इसे लेकर मंथन चल रहा है। अन्य विकल्पों पर भी हो विचार।
- दून में हरियाली बरकरार रखने के लिए पौधरोपण और इनकी सुरक्षा को उठाए जाएं कदम।

पैनलिस्ट और विशेषज्ञों की राय

'सुरक्षा की जरूरत सबको है। पुलिस सुरक्षा कैसी है, यह अहम मामला नहीं है, बल्कि कानून का डर कितना असरदार है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। साइबर क्राइम की रोकथाम तभी असरदार होगी, जब पुलिस, शिक्षक एवं अभिभावक एक मंच पर बैठ मंथन करेंगे। सरकार हर जगह सीसीटीवी कैमरे नहीं लगा सकती। व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और कॉलोनियों में सीसीटीवी कैमरे लगवाना अनिवार्य होना चाहिए।
- विनोद चमोली, विधायक एवं निवर्तमान महापौर, देहरादून

'नेहरू कॉलोनी में 19 लोगों के साथ एटीएम जालसाजी मामले के बाद पुलिस ने साइबर क्राइम पर विशेष ध्यान दिया। इसके बाद कई साइबर क्राइम के मामले सुलझाए गए। देहरादून में पुलिस ने 200 सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं, जबकि निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों के 2500 कैमरे लगे हैं। और कैमरे लगाने को प्रयास चल रहे हैं। महिला व बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने कई कदम उठाए हैं। नशे के खिलाफ अभियान छेड़ा गया है। यातायात को लेकर पुलिस स्कूलों में विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से कार्यशालाएं आयोजित कर रही हैं।
- निवेदिता कुकरेती, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून

'स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हों इसके लिए निजी क्षेत्र के अस्पतालों पर सरकार का नियंत्रण होना चाहिए। मॉनीटरिंग सिस्टम को विकसित करना होगा। साथ ही सरकारी क्षेत्र के अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ानी होंगी। दून में आज 23.30 घंटे नियमित बिजली दी जा रही है। शहर में जगह कम होने के कारण कॉपेक्ट सब स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। साल-दर साल उद्योगों में बिजली की खपत बढ़ती जा रही है। भविष्य में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि कोई भी कॉलोनी विकसित होने पर वहां विद्युत ट्रांसफार्मर के लिए भूमि की व्यवस्था हो।'
- बीसीके मिश्रा, प्रबंध निदेशक, उत्तराखंड पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड

'बेहतर पब्लिक टॉसपोर्ट एवं पुख्ता सुरक्षा औद्योगिक विकास के लिए जरूरी है। हमें बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाना होगा, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जाए कि दून रहने के लिए बेहतर शहर है। शहर में रेलवे, हाइवे, हवाई सेवा, बिजली जैसा आधारभूत ढांचा सुदृढ़ होने पर यहां उद्यमी निवेश के लिए आकर्षित होंगे।'
- सुधीर चंद्र नौटियाल, निदेशक उद्योग, उत्तराखंड

'स्कूली बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा डीएम के हाथों में होना चाहिए। स्कूलों में नियमित सुरक्षा को लेकर कार्यशालाएं हों। स्वास्थ्य व्यवस्था तभी सुधरेगी, जब हेल्थ गर्वनेंस होगी। आज नॉन मेडिकल माफिया स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन कर रहे हैं। चिकित्सा जैसे पुण्य कार्य में लूटखसोट का बढऩा चिंता का विषय है।
- डॉ. गीता खन्ना, पूर्व अध्यक्ष इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, देहरादून

'आमजन को भोजन और पानी पर गंभीर होना पड़ेगा। स्वास्थ्य समस्याएं यहीं से पैदा हो रही हैं। लिहाजा, प्रिवेंटिव हेल्थ पर फोकस करना समय की मांग है। कानून को स्कूली स्तर पर पढ़ाना होगा। बच्चों को बताना होगा कि ट्रैफिक पुलिस आपकी मित्र है। बाहर से आकर यहां रह रहे लोगो का पुलिस वैरिफिकेशन भी जरूरी है।'

- डॉ. बृजमोहन शर्मा, सचिव, स्पेक्स संस्था, देहरादून

'सरकार को शिक्षा नीति बनाते समय निर्धन एवं झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों पर भी ध्यान रखना होगा। सामाजिक सुरक्षा के दायरे में केवल संभ्रात वर्ग के बच्चे लिए जाएं, यह निर्धन एवं पुलों के नीचे झोपड़ पट्टियों में रहने वाले हजारों बच्चों के साथ अन्याय है। परिजनों की बेकारी एवं अशिक्षा का खामियाजा मासूम बच्चा उठाए तो यह हमारे पूरे सिस्टम की विफलता मानी जाएगी।'
- डॉ. गिरिबाला जुयाल, संस्थापक मनुर्भव संस्था, देहरादून

'ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों एवं महिलाओं की सुरक्षा भी एक बड़ा सवाल है। नशा विरोधी अभियान, ट्रैफिक नियमों का पालन एवं साइबर क्राइम जैसे मुद्दों पर पुलिस की ओर से होने वाली कार्यशाला ग्रामीण स्कूलों में भी आयोजित हो। इसके लिए पुलिस स्थानीय संस्थाओं का सहयोग ले सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला एवं बाल अधिकार संरक्षण कानून पूरी तरह प्रभावी नजर नहीं आता।'
- डॉ. किरन नेगी, सचिव, वाइज संस्था (हेस्को), देहरादून

'स्कूली छात्रों को साइबर क्राइम के प्रति जागरूक करने, नशा विरोधी अभियान से जोड़ने एवं यातायात के नियमों का पालन करने जैसे अभियान के बीच स्कूल रोड़ा बन रहे हैं। कई संस्थाएं स्कूलों में जागरूकता अभियान के तहत कार्यशाला करनी चाहती है, लेकिन स्कूल प्रबंधन इजाजत नहीं देता। पुलिस अपने पास संस्थाओं की लिस्ट तैयार करें और बेहतर काम करने वाली संस्था को जागरूकता अभियान की जिम्मेदारी दे तो इसके सार्थक परिणाम दिखाई देंगे।'
- आदर्श, मैड संस्था, देहरादून

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By Nandlal Sharma