खुशनुमा आबोहवा की पहचान रखने वाले देहरादून की देश-दुनिया में एक और खास पहचान है। पांडवकाल में गुरु द्रोणाचार्य ने पांडवों को शिक्षा और शस्त्र शिक्षा के लिए दून की धरती को ही चुना। तब से जल रही शिक्षा की यह अखंड लौ आज भी दैदीप्यमान है। बल्कि यूं कहें कि वक्त के साथ यह और सशक्त हुई और देश-दुनिया में देहरादून एजुकेशन हब के रूप में उभरा।

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स्कूली शिक्षा के साथ ही अब दून ने उच्च व तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में सफलता की ऊंचाईयों को छुआ है। देश-दुनिया की तमाम शख्सियतों ने स्कूली से लेकर उच्च शिक्षा तक दून में ही ग्रहण की। इस सजल पक्ष के चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी चुनौती है शैक्षिक गुणवत्ता के स्तर को बनाए रखने की।

दून से निकली नामचीन हस्तियां

प्रतिष्ठित दून व वेल्हम समेत दून के स्कूल-कॉलेजों से शिक्षार्जन कर निकलीं तमाम हस्तियां विश्व पटल पर बहुआयामी ज्ञान के उजियारे से रोल मॉडल बनकर उभरीं। दून स्कूल से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन जैसी शख्सियतों के साथ ही राजनीति, उद्योग समेत अन्य क्षेत्रों में यहां पढ़े लोगों ने पहचान बनाई। न सिर्फ स्कूली शिक्षा बल्कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी दून ने अलग पहचान बनाई है।

 

 

राज्य के सबसे बड़े डीएवी पीजी कॉलेज से पढ़ाई करने वाली कई हस्तियों ने अपना लोहा मनवाया है। इनमें मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति शिव सागर राम गुलाम, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री लोकेश बहादुर चंद, उप्र व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी, उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी समेत केंद्र और राज्य की अनेक सियासी हस्तियां शामिल हैं।

पब्लिक सर्विस कमीशन के पूर्व सदस्य डॉ.ओम नागपाल, प्रसिद्ध कपिल कॉमेडी शो के निदेशक भरत कुकरेती, अमेरिका के शियाटल में प्रतिष्ठित आइबीएम के सदस्य धर्मेश चौहान जैसे नामचीन हस्तियां भी डीएवी की देन हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में उत्तरोत्तर प्रगति

स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च व तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में दून उत्तरोत्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। प्रतिष्ठित स्कूल- कॉलेजों के बाद आधुनिक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी दून तेज से उभरा है। जेएनयू की तर्ज पर दून विश्वविद्यालय में आज कॉमर्स सहित आधे दर्जन विषयों में इंटीग्रेडेट कोर्स संचालित हो रहे हैं।

आधा दर्जन विदेशी भाषाओं में यहां विद्यार्थी निपुण हो रहे हैं। दून में वर्तमान में एक दर्जन सरकारी व निजी विश्वविद्यालय हैं, जिनमें एक लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पठन-पाठन, शिक्षा विस्तार एवं शोध कार्य में जुटे हैं।

वहीं, उत्तराखंड तकनीकी विवि, जहां उद्योगों की जरूरत के अनुरूप युवा शक्ति को तकनीकी ट्रेडों के लिए तैयार कर रहा है तो यूनिवर्सिटी आफ पेट्रोलियम एंड इनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) और आइएमएस यूनिवर्सिटी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा के लिए प्रौद्योगिकी शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। ये हैं प्रमुख चुनौतियां

बुनियादी और उच्च शिक्षा में बेहतरीन उपलिब्ध हासिल करने वाले दून के समक्ष युवाओं को उनकी शिक्षा के अनुरूप बेहतर रोजगार उपलब्ध करवाना एक चुनौती है। ग्लोबल स्तर पर फैली बेरोजगारी से दून की अछूता नहीं हैं। प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में उच्च शिक्षा की पढ़ाई पूरी करने वाले प्रत्येक छात्र को सरकारी नौकरी मिलना संभव नहीं है। ऐसे में स्टार्टअप जैसे दूरदर्शी उद्यमिता प्रोग्राम शुरू करने की आवश्यकता है। ताकि, युवा नौकरी लेने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले योग्य उद्यमी बन सके।

ऐसे पा सकते हैं चुनौतियों से पार

एजुकेशन हब की पहचान और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार से लेकर संस्थाओं के स्तर तक ठोस एवं प्रभावी पहल की दरकार है। उच्च शिक्षा में स्थानीय संसाधनों के उपयोग कर शोध कार्यों में अधिमान देना होगा। सरकार एवं निजी क्षेत्र में सेवा के बेहतर संभावनाएं पैदा करनी होगी, ताकि युवा पीढ़ी को बेहतर कॅरियर के लिए पलायन को मजबूर न होना पड़े।

दून में शिक्षा पर एक नजर

निजी स्कूल

सीबीएसई, आइसीएसई व उत्तराखंड बोर्ड से संबद्ध - 59

सरकारी स्कूल

प्राइमरी- 103

जूनियर हाईस्कूल- 60 (25 प्राइमरी सहित)

माध्यमिक

सरकारी- 40

अशासकीय- 65

उच्च शिक्षण संस्थान

विश्वविद्यालय

सरकारी- 04 (दून विवि, उत्तराखंड तकनीकी विवि, आयुर्वेद विवि एवं एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विवि)

निजी- 06 (ग्राफिक एरा, इक्फाई, आइएमएस, सुभारती, श्री गुरूराम रा, यूपीईएस)

मेडिकल विश्वविद्यालय

सरकारी- 01

निजी- 01

सरकारी कॉलेज- 01 (राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर)

सहायता प्राप्त अशासकीय कॉलेज- 04 (डीएवी, डीबीएस, एमकेपी, श्री गुरूराम राय पीजी कॉलेज)

तकनीकी शिक्षण संस्थान

सरकारी- 09 

निजी- 17

By Nandlal Sharma