समाज में नैतिक मूल्यों में आई गिरावट, अपराध का बढ़ता ग्राफ और इंटरनेट के दुरुपयोग जैसी चीजें सुकून के शहर दून में भी प्रतिबिंबित हुई हैं। स्वाभाविक तौर पर इससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के प्रति अपराध भी बढ़ा है। इंटरनेट और मोबाइल के बढ़ते दायरे से जहां तमाम सहूलियतें मिली हैं, वहीं इसके दुरुपयोग या जाने-अनजाने हुए गलत इस्तेमाल ने महिलाओं और बच्चों के प्रति एक अलग तरह के अपराध को जन्म दे दिया है।

अपने शहर को शानदार बनाने की मुहिम में शामिल हों, यहां करें क्लिक और रेट करें अपनी सिटी

क्राइम ब्रांच, क्राइम इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीबीसीआइडी) के डीआइजी पुष्पक ज्योति ने यह बात कही। बकौल डीआइजी पुष्पक ज्योति- 'बाहर से आ रहे अनजान, अजनबी लोगों के सत्यापन में विभिन्न स्तर पर बरती जा रही कोताही ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के प्रति भी अपराध को बढ़ावा दिया है। इससे पुलिस के सामने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के मद्देनजर भी चुनौती बढ़ी है। पुलिस खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के प्रति होने वाले अपराध के प्रति बेहद गंभीर रहती है।

दून शहर में महिलाएं देर रात तक बाजार में खरीदारी करते, घूमते और गली मोहल्लों में बेखौफ टहलती नजर आती हैं, पुलिस की सक्रियता और पुलिस पर लोगों का ऐतबार भी कहीं न कहीं इसकी एक वजह है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि सुरक्षा और अपराध को लेकर आमजन भी सतर्क रहें।

सतर्क रहें और दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाएं

महिला सुरक्षा के मुद्दे पर डीआईजी पुष्पक ज्योति कहते हैं कि बदलते परिवेश में महिलाओं के प्रति हिंसा और अपराध में बढ़ोतरी हुई है। आपराधिक तत्वों से निपटने को पुलिस चौबीसों घंटे तत्पर रहती है। महिलाओं को भी खुद की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।

वह महिलाओं से यह भी अपील करते हैं कि संदिग्ध नजर आने वाले व्यक्तियों, आपराधिक तत्वों के प्रति सतर्क रहें और इस तरह के लोगों के खिलाफ दृढ़ता दिखाएं। घर या बाहर किसी की भी हरकत संदिग्ध लगने पर शोर मचायें और पुलिस को सूचित करें। अकेले होने पर साथ में लाल मिर्च का पाउडर जरूर रखें, छेड़छाड़ या दूसरी तरह का अपराध करने वाले की मंशा को भांपते हुए आपराधिक तत्वों की आंखों में मिर्च फेंक दें।

घर में अकेले होने पर किसी अजनबी मैकेनिक, बिजली, टीवी, पानी का कनेक्शन या दूसरे किसी यंत्र की रिपेयरिंग करने वालों, बिजली मीटर रीडर और अन्य अनजान व्यक्तियों को अंदर न आने दें। मीटर रीडर आदि का आईकार्ड मांगकर उसे जरूर जांच-परख लें। घर या बाजार से ऑटो या टैक्सी कर रहे हों तो चालक का फोटो और वाहन नंबर अपने परिचितों को वाट्स ऐप कर लें। इस बात का आभास वाहन चालक को जरूर करा दें, ताकि वह कोई अपराध करने की सोच रहा हो तो इसकी हिम्मत ही न जुटा पाए।

फेक आईडी के प्रति रहें सचेत
डीआईजी पुष्पक ज्योति कहते हैं कि आजकल फेक आईडी से भी कुछ लोग युवतियों-महिलाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं। महिलाओं-युवतियों के प्रोफाइल या अन्य छद्म नामों से फेक आईडी बनाकर तमाम पुरुष उनसे दोस्ती गांठकर अपराध करते हैं। उनका कहना कि अजनबियों से भी फेसबुक, वाट्स ऐप या अन्य सोशल मीडिया पर नजदीकी न बढ़ाएं।

बच्चों को दोस्त बनाएं अभिभावक
आपराधिक और विकृत मानसिकता वाले व्यक्ति बच्चों को अपना सॉफ्ट टारगेट बनाते हैं। ऐसे में बच्चों को अपराध और अपराधियों से बचाने के लिए सबसे ज्यादा भूमिका माता-पिता और अन्य अभिभावकों की हो जाती है। घर से लेकर स्कूल तक बच्चों की सुरक्षा के जरूरी कदम उठाएं। पुलिस ने भी प्रदेश भर की तरह दून शहर के भी तमाम स्कूलों के प्रबंधन के साथ बैठक कर बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं।

स्कूलों से साफ कहा गया है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर ठोस उपाय करें। स्कूलों में सुरक्षा की दृष्टि से चिह्नित जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाएं जाएं। अभिभावकों को चाहिए कि स्कूल से आने-जाने के लिए बच्चों को ऑटो या वैन लगाने से पहले उन वाहनों के चालकों के बारे में परिचितों या पुलिस से पता जरूर कर लें। साथ ही चालक का आइडी और एक फोटो भी ले लें। इसे स्कूल के जिम्मेवार पद पर बैठे व्यक्तियों को भी दे दें।

बच्चों को दें पासवर्ड
बच्चों को कोई पासवर्ड बता दें। अगर कोई अजनबी आकर कहता है कि उनके मम्मी-पापा या किसी और अभिभावक ने लाने के लिए भेजा है तो बच्चा उस व्यक्ति से पासवर्ड पूछे। ऐसे व्यक्तियों द्वारा ठीक पासवर्ड न बताने पर शोर मचाकर इसकी सूचना स्कूल प्रबंधन या आसपास मौजूद लोगों को दें। अभिभावक बच्चों से पूछें कि स्कूल से आते-जाते वक्त चालक वाहन लेकर कहां-कहां जाते हैं और किन लोगों से मिलते हैं। चालक या परिचालक की संदिग्ध हरकतों के बारे भी बच्चे से पूछें।

अभिभावक बच्चों को गुड टच, बैड टच के बारे में भी बताएं। बच्चों को मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल न करने दें। इस बात का विशेष ध्यान दें कि बच्चा मोबाइल में क्या देख रहा है। बच्चों को बताएं कि किसी भी अजनबी से टॉफी, बिस्कुट या चॉकलेट आदि न खाएं। बच्चों से ऐसे लोगों के बारे में जरूर पूछा करें। अभिभावक बच्चों के साथ दोस्त की तरह रहें, ताकि वह अपनी हर परेशानी को आपसे से शेयर कर सकें। जरूरत पडऩे पर मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक भी अवश्य सलाह लें।

ग्रुप बनाकर कुशलक्षेम पूछते रहें बुजुर्ग
दून शहर बुजुर्ग और सेवानिवृत्त लोगों की पहली पसंद होने की वजह से यहां पर बड़ी संख्या में बुजुर्ग रहते हैं। कई बुजुर्ग यहां पर बड़े-बड़े घरों में एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अपराधी ऐसे बुजुर्गजनों को आसानी से निशाना बना देते हैं।

डीआइजी पुष्पक ज्योति का कहना है कि एकाकी जीवन जी रहे बुजुर्ग लोग विभिन्न मोहल्ले-कॉलोनियों में एसोसिएशन बना लें। दिन भर में दो-तीन बार एक-दूसरे की कुशलक्षेम पूछते रहें। संभव हो तो वाट्स ऐप ग्रुप बनाकर भी आपस में संवाद रख सकते हैं। बाहरी और अजनबी व्यक्ति को बिना जांचे परखे किसी भी सूरत में अंदर आने की अनुमति न दें।

यह भी पता न लगने दें कि वे घर में अकेले हैं। किराएदार, चौकीदार या केयर टेकर रख रहे हैं तो उनका पुलिस सत्यापन जरूर कराएं। पुताई या दूसरा मजदूरी का काम कराने वालों का भी पुलिस सत्यापन कराएं और उन्हें घर में रखे कैश, ज्वैलरी या अन्य कीमती सामान की जानकारी न दें।

अपने शहर को शानदार बनाने की मुहिम में शामिल हों, यहां करें क्लिक और रेट करें अपनी सिटी

By Nandlal Sharma