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नीट-यूजी में स्वतंत्रता सेनानी कोटे में फर्जीवाड़ा: उत्तराखंड में चार पर केस, डिजिटल ट्रेल से खुलेगी पोल

Published: Thu, 17 Sep 2026 07:59 AM (IST)

पुलिस स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में फर्जी एमबीबीएस दाखिले की जांच कर रही है, जिसमें ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया का डिजिटल ट्रेल मुख्य आधार होगा।

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जागरण संवाददाता, देहरादून। स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर एमबीबीएस सीट हासिल करने के मामले में अब पुलिस की जांच का फोकस ऑनलाइन किए गए आवेदन की प्रकिया पर रहेगा, जिससे पता चलेगा कि आवेदन से लेकर स्वीकृति तक प्रपत्र किन-किन स्तर से पास किए गए।

काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के कारण अभ्यर्थियों के आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज अपलोड करने तक का रिकार्ड मौजूद है।

चार अभ्यर्थियों पर केस दर्ज

मामले में चार अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे का लाभ लेने के लिए प्रमाण पत्र लगाए थे। सत्यापन के दौरान प्रमाण पत्रों में दर्ज पते गलत पाए गए। संबंधित रिकार्ड में जिस स्वतंत्रता सेनानी के नाम का प्रमाण पत्र लगाया गया, उसका नाम भी सरकारी अभिलेख में नहीं मिला।

इसके बाद दाखिले निरस्त किए गए और मुकदमा दर्ज कराया गया। अब जांच में सबसे अहम कड़ी ऑनलाइन आवेदन हो सकते हैं।

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पुलिस चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय से चारों अभ्यर्थियों के आवेदन का पूरा डिजिटल रिकार्ड मांग सकती है। इसमें आवेदन के दौरान इस्तेमाल मोबाइल नंबर, ईमेल, दस्तावेज अपलोड होने का समय और उपलब्ध तकनीकी लाग की पड़ताल की जा सकती है।

गलत पते का मामला भी जांच में अहम

चारों आवेदनों में यदि कोई समान मोबाइल नंबर, ईमेल, तकनीकी विवरण या दस्तावेज अपलोड करने का पैटर्न मिलता है तो वह जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। जांच का दूसरा सिरा फर्जी प्रमाणपत्रों तक जाएगा। इसके लिए अभ्यर्थियों से पूछताछ के साथ उनके आवेदन और दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया की जानकारी ली जा सकती है।

वहीं, गलत पते का मामला भी जांच में अहम रहेगा। राजस्व विभाग से प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया, आवेदन और सत्यापन से जुड़े रिकार्ड लिए जा रहे हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि गलत पते और ऐसे व्यक्ति के नाम का प्रमाणपत्र तैयार होने की प्रक्रिया कहां से शुरू हुई।