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स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में बड़ा फर्जीवाड़ा, देहरादून में चार एमबीबीएस दाखिले रद्द

Published: Sat, 12 Sep 2026 12:16 PM (IST)

देहरादून में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले चार अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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जागरण संवाददाता, देहरादून स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले चार अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इन चारों मामलों में धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र लगाया गया था, लेकिन जिला प्रशासन की संबंधित पंजिका में उनका नाम ही दर्ज नहीं मिला।

जांच में आवेदन में दिए गए पते पर भी चारों अभ्यर्थी या उनके परिवार के लोग नहीं मिले। इसके बाद जिला प्रशासन ने चारों प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए। प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने भी चारों एमबीबीएस दाखिले भी रद कर दिए हैं। मामला राज्य कोटे में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणी से एमबीबीएस प्रवेश का है।

चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने इस श्रेणी में प्रवेश पाने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच के लिए जिलाधिकारी देहरादून को पत्र भेजा था। इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने चारों मामलों की स्थलीय और दस्तावेजी जांच कराई।

चिकित्सा शिक्षा विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल के अनुसार उक्त दाखिले रद कर दिए गए हैं। यह चारों सीट अब रिक्त मानी जाएंगी और इन्हें अब अगले चरण की काउंसलिंग में शामिल किया जाएगा। आगे और क्या कार्रवाई की जानी है, इस पर भी विवि प्रशासन जल्द निर्णय लेगा।

एक ही नाम से चार दावे
जांच में सामने आया कि तृप्ति पुत्री रामपाल सिंह, स्वाति पुत्री जगपाल सिंह, खुशी पुत्री प्रवीण कुमार और परी पुत्री अरविन्द कुमार के आवेदनों में धर्मवीर वर्मा के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र लगाया गया था। लेकिन कलक्ट्रेट में एक फरवरी 2005 से अब तक संरक्षित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उत्तराधिकारियों को जारी परिचय पत्रों की पंजिका में धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह का नाम नहीं मिला।

यानी जिस स्वतंत्रता सेनानी के आधार पर चारों ने आश्रित प्रमाणपत्र हासिल किए, सरकारी रिकार्ड में उनका नाम ही नहीं मिला। इसी तथ्य ने चारों प्रमाणपत्रों की वैधता पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया।

मोथरोवाला में तृप्ति का पता भी नहीं मिला
तृप्ति पुत्री रामपाल सिंह के आवेदन में मोथरोवाला का पता दर्ज था। राजस्व उप निरीक्षक ने मौके पर जांच की तो तृप्ति या उनके परिवार का कोई सदस्य वहां नहीं मिला। आसपास पूछताछ में भी इस नाम के व्यक्ति की जानकारी नहीं मिली। क्षेत्रीय पार्षद ने भी ऐसे व्यक्ति के वहां रहने की पुष्टि नहीं की। आवेदन में दर्ज मोबाइल नंबर भी किसी अन्य व्यक्ति का पाया गया।

तरली कंडोली में तीनों परिवार गायब
स्वाति पुत्री जगपाल सिंह, खुशी पुत्री प्रवीण कुमार और परी पुत्री अरविन्द कुमार के आवेदन में राजीव नगर, तरली कंडोली का पता दर्ज था। तीनों मामलों में स्थलीय जांच के दौरान अभ्यर्थी और उनके परिवार के लोग इस पते पर निवासरत नहीं मिले। आसपास पूछताछ में भी संबंधित परिवार की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई। क्षेत्रीय पार्षद ने भी दर्ज नामों के किसी व्यक्ति के वहां रहने की जानकारी नहीं दी। इन आवेदनों में दर्ज मोबाइल नंबर भी दूसरे लोगों के पाए गए।

पेंशन पट्टा और निवास प्रमाणपत्र तक नहीं लगाए
जांच में आनलाइन आवेदनों की भी पड़ताल की गई। स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के लिए पांच दस्तावेज आवेदक का फोटो, पेंशन पट्टा, पहचान पत्र, निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता सेनानी का कार्ड लगाना जरूरी था।

चारों आवेदनों में निवास प्रमाणपत्र, पेंशन पट्टा और स्वतंत्रता सेनानी का कार्ड नहीं लगाया गया था। निवास प्रमाणपत्र की जगह अभ्यर्थी, उनके पिता और माता के आधार कार्ड लगाए गए थे। लेकिन राजस्व अधिकारियों की स्थलीय जांच में आधार कार्ड पर दर्ज पते पर भी संबंधित लोग नहीं मिले।

शपथपत्रों में भी सामने आईं विसंगतियां
जांच के दौरान शपथपत्रों में भी कई गड़बड़ियां सामने आईं। स्वाति के आवेदन के साथ लगाए गए शपथपत्र में दूसरे व्यक्ति का टंकित कथन मिला। उसके एक बिंदु में धर्मवीर वर्मा की पोती के रूप में एक अन्य नाम दर्ज था।

परी के मामले में भी शपथपत्र में उसके नाम और पारिवारिक विवरण को लेकर विसंगति पाई गई। तहसीलदार की विस्तृत जांच में चारों प्रमाणपत्रों को संदिग्ध बताते हुए निरस्त करने की संस्तुति की गई। रिपोर्ट के आधार पर उप जिलाधिकारी (सदर) अपूर्वा सिंह ने 10 सितंबर को चारों स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए।