संवाद सहयोगी, विकासनगर: तीन वर्ष से मानदेय की राह ताक रहे मदरसा शिक्षकों ने अब शिक्षा मंत्री को अपनी व्यथा बताते हुए मानदेय दिलाने की गुहार लगाई है। आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे देहरादून, हरिद्वार सहित चार जिलों के मदरसा शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात पर सरकार पर भेदभाव का आरोप भी लगाया।

मदरसा शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मो. इस्लाम ने कहा कि तीन साल से मानदेय नहीं मिलने से अधिकांश मदरसे बंद होने की कगार पर आ गए हैं। उन्होंने कहा कि मानदेय भुगतान की मांग को लेकर कुछ माह पहले शिक्षक अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक से मिलने गए थे। लेकिन, छह घंटे इंतजार करने के बाद भी निदेशक शिक्षकों से नही मिले। कहा कि शासन-प्रशासन की बेरुखी से जाहिर है कि साजिश के तहत मदरसा शिक्षकों का मानदेय व मदरसों को मिलने वाला अनुदान रोका जा रहा है। कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एसपीक्यूएम के आवंटन संबंधी तीन सितंबर को होने वाली बैठक को भी स्थगित कर दिया गया है।

मदरसा शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष मो. इस्लाम ने शिक्षा मंत्री अर¨वद पांडेय को बताया कि देहरादून के 23 मदरसों में कार्यरत 78 शिक्षकों सहित राज्यभर के 243 मदरसों के शिक्षकों को समग्र शिक्षा अभियान के तहत एसपीईएमएम योजना से दो श्रेणियों में मानदेय दिया जाता है। प्रशिक्षित शिक्षकों को केंद्र सरकार बारह हजार व अप्रशिक्षित शिक्षकों को छह हजार प्रतिमाह मानदेय देती है। पिछले तीन साल से योजना के तहत मिलने वाला मानदेय इन शिक्षकों को नहीं मिल रहा है। बताया कि शिक्षकों द्वारा आंदोलन की चेतावनी देने पर सरकार ने कुछ शिक्षकों को एक वर्ष का लंबित मानदेय दिया, जबकि कुछ शिक्षकों को बजट की कमी का हवाला देकर मानदेय से वंचित रखा है। तीन साल से मानदेय नहीं मिलने के चलते कई शिक्षक मदरसों के बजाय अन्य निजी शिक्षण संस्थानों का रुख कर रहे हैं। जिससे मदरसों में अध्ययनरत हजारों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही राज्य सरकार व केंद्र सरकार ने मदरसों को अनुदान देना भी अघोषित तौर पर बंद कर दिया है। शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री से शीघ्र मानदेय दिलाए जाने के लिए उचित कार्रवाई की मांग की है। शिक्षा मंत्री से मुलाकात करने वालों में यशवीर, शाहवेज, अनीस, गुलशनवर, दीपा राणा, विलकीश फातिमा, खालिद, अंजार, मुस्तफा आदि शामिल रहे।

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