देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) के वरिष्ठ अधिकारियों की लगातार हो रही कमी अब प्रदेश के विकास कार्यो पर असर डालने लगी है। वहीं, बिहार विधानसभा चुनावों में भी 12 आइएएस अधिकारियों के जाने से उनके विभागों के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इन अधिकारियों के लिंक अधिकारी तो बनाए गए हैं लेकिन वे भी केवल कोर्ट केस और बेहद जरूरी मामलों पर ही निर्णय ले रहे हैं।

प्रदेश में आईएएस अधिकारियों के तय काडर के अनुसार यहां कुल 120 अधिकारी होने चाहिए। इसके सापेक्ष प्रदेश में अभी तकरीबन 90 अधिकारी ही सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से भी सात अधिकारी अन्य प्रदेशों के काडर के हैं, जबकि प्रदेश से सात अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में कार्यरत हैं।

इस समय आइएएस संवर्ग के ढांचे पर नजर डाली जाए तो अभी यहां एक मुख्य सचिव, दो अपर मुख्य सचिव, एक प्रमुख सचिव के अलावा सचिव, प्रभारी सचिव और अपर सचिव तैनात हैं। मानकों के अनुसार सचिवालय में प्रमुख सचिव स्तर के 15 और सचिव स्तर के 22-24 अधिकारी होने चाहिए। अधिकारियों की कमी का नतीजा यह है कि एक अधिकारी को कई-कई विभाग देखने पड़ रहे हैं। इससे सभी विभागों के साथ पूरा न्याय नहीं हो पा रहा है। इस कारण कई अहम फाइलें लंबे समय से एक ही अधिकारी के कार्यालय से बाहर नहीं आ पा रही हैं। सरकारी बैठकों में भी इस बात को महसूस किया गया है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली सचिव समिति की बैठक में ये बातें उठ चुकी हैं। इस दौरान यह बात भी सामने आई कि कार्य की अधिकता के कारण फाइलों का त्वरित निस्तारण नहीं हो पा रहा है। फिलहाल कोरोना के कारण बने हालात में शासन इन्हीं अधिकारियों से कार्य लेने को मजबूर है। वहीं, बीते वर्ष प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र को पत्र लिखकर प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए अधिकारियों को वापस भेजने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद केवल एक ही अधिकारी की अभी तक वापसी हुई है।

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