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Kathua Terror Attack: बलिदानी की बहनें बोली- 'कोई रोना मत, मेरा भाई घर आया है...' और यह सुन भर आई सबकी आंख

Kathua Terror Attack बलिदानी विनोद का पार्थिव शरीर बुधवार को एम्स ऋषिकेश से सेना के वाहन में डोईवाला के अठूरवाला स्थित आवास लाया गया। बलिदानी का पार्थिव शरीर देखते ही मां शशि देवी और पत्नी नीमा सुध-बुध खो बैठे। पार्थिव शरीर को देखकर कोई भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था तब सीमा और राखी यह कहकर सभी को ढाढस बंधाती रहीं कि रोओ मत मेरा भाई आया है।

By mahendra singh chauhan Edited By: Nirmala Bohra Thu, 11 Jul 2024 09:24 AM (IST)
Kathua Terror Attack: बलिदानी की बहनें बोली- 'कोई रोना मत, मेरा भाई घर आया है...' और यह सुन भर आई सबकी आंख
Kathua Terror Attack: पार्थिव शरीर देखते ही मां शशि देवी और पत्नी नीमा सुध-बुध खो बैठे

महेन्द्र सिंह चौहान, जागरण  डोईवाला। Kathua Terror Attack: कोई भी रोना मत, मेरा भाई घर आ रहा है...। ये शब्द हैं बलिदानी नायक विनोद सिंह भंडारी की बहनों के। एक बलिदानी की वीर बहनें ही अपने दिल पर पत्थर रखकर यह बात कह सकती हैं।

बहनों के इसी प्रोत्साहन से विनोद ने देश सेवा की राह चुनी और देश पर प्राण न्योछावर करते हुए अमर हो गए। नायक विनोद के बलिदान के बाद उनकी तीन बहनों को इस बात का गम तो है कि अब वह रक्षाबंधन पर राखी किसे बांधेंगी, लेकिन साथ में यह गर्व भी है कि भाई ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। तीनों बहनें भाई की अंतिम यात्रा में भी शामिल हुईं।

बलिदानी विनोद का पार्थिव शरीर बुधवार को एम्स ऋषिकेश से सेना के वाहन में डोईवाला (देहरादून) के अठूरवाला स्थित उनके आवास लाया गया। वाहन जब उनके आवास से कुछ दूरी पर रुका तो हर किसी की आंख नम हो गई। बलिदानी का पार्थिव शरीर देखते ही मां शशि देवी और पत्नी नीमा सुध-बुध खो बैठे। पिता वीर सिंह भंडारी ने किसी तरह अपनी भावनाओं को आंखों से बहने से रोका और एकटक बेटे को निहारते रहे। विनोद की तीन बहने हैं।

दो बहनें सीमा और राखी उनके घर पहुंच गई थीं और वहीं से बलिदानी की अंतिम यात्रा में शामिल हुईं। तीसरी बहन नीमा कनाडा में थीं, वह मुनिकीरेती में गंगा घाट पर अंतिम यात्रा में शामिल हो पाईं। जब तिरंगे में लिपटे बलिदानी विनोद के पार्थिव शरीर को देखकर कोई भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था, तब सीमा और राखी यह कहकर सभी को ढाढस बंधाती रहीं कि रोओ मत, मेरा भाई आया है।

दोनों बहने खुद को संभाले हुए थीं, ताकि माता-पिता व अन्य स्वजन को संभाल सकें। वह कभी स्वजन को संभालतीं तो कभी भाई के पार्थिव शरीर को निहारतीं। बलिदानी की वयोवृद्ध दादी प्यारी देवी को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि वह अपने लाडले को फिर कभी नहीं देख पाएंगी। बलिदानी की बहन नीमा जब मुनिकीरेती गंगा घाट पर पहुंचीं, तब तक चिता आधी जल चुकी थी। नीमा ने जब यह दृश्य देखा तो कहने लगीं कि भाई अभी जिंदा है, उसे क्यों जला दिया। यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें आंसुओं से भर गईं।

अभी काम से जा रहा हूं, वापस आकर बात करूंगा

आतंकी हमले से कुछ देर पहले विनोद ने पत्नी नीमा से बात की थी। तब उन्होंने कहा कि अभी काम से जा रहा हूं, वापस आकर फोन करूंगा। उस वक्त नीमा को क्या मालूम था कि विनोद से हुई यह बात आखिरी होगी। अब वह रह-रहकर पुरानी बातों को याद कर रही हैं। विनोद के निधन से दो मासूम बच्चों के साथ ही उनके माता-पिता और दादी को संभालने की जिम्मेदारी नीमा पर आ गई है।

पति को अंतिम विदाई देने से पहले वह चार वर्षीय पुत्र सारांश को पिता का चेहरा दिखाकर उन्हें अंतिम बार देखने के लिए कहती रहीं। पिता के शरीर में कोई हरकत न देख मासूम सारांश भी आंसू नहीं रोक पाया। नीमा ने सुहाग की निशानी अपनी चुनरी भी पति के पार्थिव शरीर पर अर्पित कर दी।