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कालसी-चकराता में 11 गांवों से खुलेगा पर्यटन गलियारा, बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

Published: Sat, 12 Sep 2026 07:17 PM (GMT+05:30)

ग्राम्य विकास विभाग कालसी-चकराता क्षेत्र में 11 ग्राम पंचायतों को चिह्नित कर पर्यटन गलियारा विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई से बनाई गई है

यह तस्वीर एआई से बनाई गई है

HighLights

  1. 11 ग्राम पंचायतों में पर्यटन गलियारा विकसित किया जा रहा है।

  2. प्राचीन मंदिरों, झरनों, नदियों के पास सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।

  3. होम स्टे, स्थानीय कारोबार से गांवों में रोजगार बढ़ेगा।

विरेंद्र कुमार, जागरण देहरादून। कालसी-चकराता के पर्यटन स्थलों को अब सिर्फ देखने की जगह नहीं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था बदलने का जरिया बनाने की तैयारी है।

ग्राम्य विकास विभाग ने क्षेत्र की 11 ग्राम पंचायतों को चिह्नित कर पर्यटन गलियारा विकसित करने की कवायद शुरू कर दी है। प्राचीन मंदिरों, झरनों, नदियों और ऐतिहासिक स्थलों के आसपास पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित होंगी।

इससे पर्यटकों की आमद बढ़ाने के साथ होम स्टे, स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प और परिवहन जैसे कारोबार को सीधे गांवों से जोड़ने की योजना है। ग्राम्य विकास विभाग कालसी, चकराता, रायपुर, सहसपुर, डोईवाला और विकासनगर विकासखंडों में नए पर्यटन स्थलों की पहचान कर रहा है।

इनमें कालसी-चकराता क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को देखते हुए विशेष फोकस किया जा रहा है। कालसी जौनसार-बावर का प्रवेश द्वार है, जबकि चकराता प्रमुख पर्वतीय पर्यटन स्थल के रूप में पहचान रखता है।

ओक और साल के जंगल, हरी घाटियां और गढ़वाल की पर्वत शृंखलाएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके अलावा क्षेत्र में प्राचीन मंदिर, धार्मिक स्थल, झरने, नदियां और ऐतिहासिक धरोहरें भी हैं।

11 पंचायतों में पहले चरण की कवायद

कालसी और चकराता में क्रमश: 111 और 116 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 11 पंचायतों को पहले चरण के लिए चुना गया है। चकराता की मैन्द्रथ, किस्टूड, पेनुवा, कांडोई-भरम, दसऊ, मलेथा और जोगियो तथा कालसी की उद्पाल्टा, पंजिया, लाच्छा और बाढौ में पर्यटन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

चयनित स्थलों के आसपास पेयजल, बिजली, ठहरने और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायतें प्रस्ताव तैयार कर विभाग को भेजेंगी। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद निर्माण और अन्य विकास कार्य शुरू किए जाएंगे।

पर्यटकों के साथ गांवों में आएगा कारोबार

विभाग का जोर पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर होम स्टे, स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प, परिवहन और छोटे कारोबार को लाभ मिलने की उम्मीद है।

यानी पर्यटन स्थल के साथ आसपास के गांव भी पर्यटक गतिविधियों का हिस्सा बनेंगे। लाखामंडल शिव मंदिर, महासू देवता मंदिर और चिंताहरण महादेव मंदिर जैसे धार्मिक स्थल पहले से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। वहीं टाइगर फाल, किमोना फाल और मोईगाड फाल जैसे झरने पर्यटन सीजन में बड़ी संख्या में लोगों को खींचते हैं।

टोंस-यमुना में जलक्रीड़ा को भी विस्तार

कालसी-चकराता की पर्यटन संभावनाओं में टोंस और यमुना नदियां भी महत्वपूर्ण हैं। कालसी के पास यमुना बैराज क्षेत्र में बोटिंग और राफ्टिंग जैसी गतिविधियां संचालित होती हैं। टोंस और यमुना में एंगलिंग जैसी गतिविधियां भी चल रही हैं। पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के साथ इन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बयान

चकराता-कालसी पर्यटकों की पहली पसंद में शामिल है। पर्यटन स्थलों और आसपास की ग्राम पंचायतों में सुविधाएं विकसित होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

सुनील कुमार, जिला विकास अधिकारी

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