देहरादून, भगत सिंह तोमर। अनूठी परंपराओं के लिए विख्यात जनजाति क्षेत्र जौनसार-बावर में माघ मरोज पर्व में विवाहित लड़कियों को बांटा भेजना जरूरी होता है। बांटा न भेजने पर रिश्ते टूट जाते हैं। बांटे के रूप में बकरे का मीट भेजना अनिवार्य होता है।

आजकल जौनसार-बावर में प्रमुख पर्व मरोज की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पर्व के दौरान पूरे एक माह तक हर गांव के पंचायती आंगन में लोक संस्कृति की झलक दिखेगी। 11 व 12 जनवरी से पूरे माह तक चलने वाले मरोज पर्व के लिए बकरों की खरीदारी तेज हो गई है।  साहिया क्षेत्र में आजकल बकरों की खूब बिक्री हो रही है। 25 से 30 हजार रुपये में बकरे बिकने से पशुपालक चांदी काट रहे हैं। हालांकि, कई परिवारों के पूरे साल भर घर पर बकरे को पाला जाता है। 

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पर्व को देखते हुए चमड़ा व्यापारी भी सक्रिय हो गए हैं। इस पर्व पर चमड़ा व्यापारियों को आसानी से बहुतायत में खाल मिल जाती है। सोमवार को साहिया क्षेत्र में तीन साल का बकरा 30 हजार रुपये के बिका। जिसे देखने के लिए काफी संख्या में भीड़ लगी। परंपरा के अनुसार मरोज पर्व पर परिवार की विवाहित लड़की को उसकी ससुराल में जाकर बकरे का हिस्सा बांटे के रूप में पहुंचाना जरूरी होता है। विवाहित लड़की के ससुराल बांटा न पहुंचने पर दोनों परिवारों का रिश्ता समाप्त माना जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।

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Posted By: Sunil Negi

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