जसपाल राणा : 18 साल की उम्र में अर्जुन, 21 में पद्मश्री; देश के वंडर ब्वाय थे जसपाल
जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के इतिहास के महान खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कम उम्र में कई बड़े मुकाम हासिल किए।

कम उम्र में खेल की दुनिया में हासिल किए बड़े मुकाम।
जागरण संवाददाता, देहरादून। भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में जब भी महान खिलाड़ियों का जिक्र होगा, जसपाल राणा का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
जिस उम्र में अधिकांश खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश करते हैं, उस उम्र में जसपाल राणा अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहरा रहे थे। अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री भी सबसे कम उम्र में प्राप्त करने वालों में जसपाल का नाम शीर्ष पर है।
1994 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता
महज 18 वर्ष की आयु में जसपाल राणा ने वर्ष 1994 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को गौरवान्वित किया। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई और वह रातोंरात देश के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ियों में शामिल हो गए।
इतनी कम उम्र में एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी, जिसने उन्हें भारतीय खेल जगत का उभरता सितारा बना दिया। इसी वर्ष उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कम उम्र में अर्जुन पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों में उनका नाम विशेष रूप से याद किया जाता है।
वर्ष 1994 के राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर साबित कर दिया कि उनकी सफलता कोई संयोग नहीं, बल्कि असाधारण प्रतिभा और कठोर मेहनत का परिणाम थी।
जसपाल राणा की उपलब्धियों का सिलसिला इतना प्रभावशाली था कि मात्र 21 वर्ष की आयु में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इतनी कम उम्र में यह सम्मान प्राप्त करना उनकी असाधारण उपलब्धियों का प्रमाण था। अपने पूरे करियर में जसपाल राणा ने राष्ट्रमंडल खेलों में 15 पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में एक विशेष स्थान बनाया।
