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जसपाल राणा: अपने हाथों से गढ़ा शूटिंग संस्थान, हर ईंट में बसती थी ‘गुरु’ की जान

Published: Sat, 13 Jun 2026 11:09 AM (IST)

महान निशानेबाज जसपाल राणा का राणा इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग स्पोर्ट्स उनकी विरासत है, जिसे उन्होंने अपने हाथों से गढ़ा था।

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HighLights

  1. जसपाल राणा ने अपने हाथों से गढ़ा शूटिंग संस्थान

  2. मनु भाकर सहित कई सितारों ने प्रशिक्षण लिया

  3. खिलाड़ियों के खानपान, अनुशासन पर विशेष ध्यान देते थे

विजय जोशी, देहरादून। मझोन गांव की पहाड़ियों के बीच स्थित राणा इंस्टीट्यूट आफ शूटिंग स्पोर्ट्स का अभिभावक इस दुनिया से चला गया, लेकिन यहां की हर ईंट में उनकी जान बसती है।

महान निशानेबाज और पद्मश्री सम्मानित जसपाल राणा के निधन के बाद उनकी अकादमी का हर कोना मानो अपने निर्माता को याद कर रहा हो। अपने हाथों से गढ़े ढांचे को जसपाल ने जीवंत कर दिया था।

पहाड़ी शैली के भवनों को तैयार करने में उनकी विशेष रुचि

वर्ष 2002 में अपने पिता नारायण सिंह राणा के मार्गदर्शन में जसपाल राणा ने इस शूटिंग रेंज की स्थापना की थी। यह केवल एक खेल अकादमी नहीं थी, बल्कि उनका सपना, उनका जुनून और उनकी जीवनभर की साधना थी। उन्होंने इसे सिर्फ बनवाया नहीं, बल्कि अपने हाथों से संवारा था।

अकादमी के स्टाफ बताते हैं कि जसपाल राणा जब भी यहां आते, किसी न किसी निर्माण या सुधार कार्य में जुट जाते थे। पहाड़ी शैली के भवनों को तैयार करने में उनकी विशेष रुचि थी। कई बार उन्हें खुद छेनी-हथौड़ा लेकर काम करते देखा गया। लकड़ी के डिजाइन, भवनों की बनावट और परिसर की सुंदरता को लेकर वह बेहद सजग रहते थे।

उनका मानना था कि यह केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के सपनों का घर है। स्टाफ की आंखें नम हो जाती हैं जब वे बताते हैं कि अभी करीब एक माह पहले ही जसपाल राणा अकादमी आए थे। उन्होंने परिसर का निरीक्षण किया, कुछ निर्माण कार्यों को लेकर सुझाव दिए और हमेशा की तरह खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।

यहां 10 मीटर एयर पिस्टल और एयर राइफल से लेकर 25 और 50 मीटर की शूटिंग के लिए अत्याधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। लेकिन, इस संस्थान की सबसे बड़ी पहचान इसकी इमारतें या उपकरण नहीं, बल्कि वे खिलाड़ी हैं जिन्हें यहां से नई उड़ान मिली।

मनु भाकर ने भी यहां लिया गुरु से प्रशिक्षण

ओलंपिक इतिहास रचने वाली भारतीय स्टार निशानेबाज मनु भाकर की सफलता के पीछे भी इसी अकादमी और जसपाल राणा के मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मनु भाकर समेत देश के कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी यहां प्रशिक्षण ले चुके हैं। उत्तराखंड से लेकर देश के विभिन्न राज्यों के युवा निशानेबाज आज भी यहां अपने सपनों को आकार देने पहुंचते हैं।'

खिलाड़ी ही नहीं एकेडमी के स्टाफ का भी बदल दिया खान-पान

देहरादून: एकेडमी के स्टाफ से बातचीत में जसपाल राणा के व्यक्तित्व का वह पक्ष सामने आया, जिसने उन्हें केवल एक चैंपियन नहीं बल्कि एक आदर्श गुरु भी बनाया। स्टाफ के अनुसार जसपाल राणा का स्वभाव बेहद सौम्य और विनम्र था। वह सभी से आत्मीयता के साथ मिलते थे, लेकिन जब बात अनुशासन और समर्पण की आती थी तो किसी भी तरह की ढिलाई उन्हें स्वीकार नहीं थी।

स्टाफ ने बताया कि जसपाल राणा खिलाड़ियों के प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं रहते थे, बल्कि उनके खानपान, रहन-सहन और दैनिक दिनचर्या पर भी विशेष ध्यान देते थे। एकेडमी में स्वास्थ्य और एकाग्रता को लेकर उनकी सोच बेहद स्पष्ट थी। उन्होंने परिसर में मांसाहार पर रोक लगवाई थी और शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देने पर जोर देते थे।

स्टाफ के सदस्यों को भी वह स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह देते थे। यदि कोई नानवेज भोजन की बात करता, तो वह मुस्कुराते हुए कहते थे कि यदि खाना ही है तो मछली खाओ, इससे शरीर को बेहतर पोषण मिलता है और एकाग्रता बनाए रखने में मदद मिलती है।

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