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पूर्वी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को आवंटित 23 करोड़ की जमीन की जांच शुरू, जानिए पूरा मामला

जिला सहायता और पुनर्वास कार्यालय (डीआरआरओ) की भूमि पर कब्जे की जांच तहसील सदर की टीम ने शुरू कर दी है। नायब तहसीलदार सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में राजस्व कार्मिकों ने आरकेडिया ग्रांट में संबंधित भूमि की पैमाइश की।

By Raksha PanthriEdited By: Published: Fri, 24 Sep 2021 02:32 PM (IST)Updated: Fri, 24 Sep 2021 02:32 PM (IST)
पूर्वी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को आवंटित 23 करोड़ की जमीन की जांच शुरू।

जागरण संवाददाता, देहरादून। पूर्वी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के लिए आवंटित जिला सहायता और पुनर्वास कार्यालय (डीआरआरओ) की भूमि पर कब्जे की जांच तहसील सदर की टीम ने शुरू कर दी है। गुरुवार को नायब तहसीलदार सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में राजस्व कार्मिकों ने आरकेडिया ग्रांट में संबंधित भूमि की पैमाइश की। हालांकि, इसी दौरान अतिक्रमण हटाने के पैरोकार और दूसरे पक्ष के बीच बहस होने लगी और देखते ही देखते दोनों पक्षों में लाठी-डंडे चल गए।

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आरकेडिया ग्रांट में शरणार्थियों को जमीन आवंटित करने के बाद डीआरआरओ के पास यहां 11 हजार 700 वर्गगज भूमि शेष रह गई थी। सुध नहीं लिए जाने के चलते कुछ व्यक्तियों ने फर्जी कागजात बना कर यह जमीन अपने नाम करा ली। इस जमीन की मौजूदा कीमत करीब 23 करोड़ रुपये है। लंबे समय तक जांच गतिमान होने के बाद भी राजस्व विभाग जमीन छुड़ाने में नाकाम रहा। यह प्रकरण बीते दिनों जिलाधिकारी डा. आर राजेश कुमार के संज्ञान में आया तो उन्होंने जांच के आदेश जारी किए। हालांकि, यह जांच ठंडे बस्ते में चली गई थी।

इस पर जागरण ने 'रिफ्यूजियों को आवंटित 23 करोड़ की भूमि हड़पी' शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। खबर का संज्ञान लेकर जिलाधिकारी ने जांच टीम गठित कर रिपोर्ट तलब की थी। तहसीलदार दयाराम ने इस क्रम में नायब तहसीलदार सुरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में टीम गठित कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए। दस्तावेजी परीक्षण के बाद टीम जमीन की पैमाइश करने पहुंची।

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जमीन की नापजोख होती देख मौके पर अतिक्रमण हटाने के पैरोकार और दूसरे पक्ष के लोग भी जमा हो गए। इसी दौरान किसी बात को लेकर दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए। इस झड़प में एक व्यक्ति के सिर पर चोट लगी। विवाद के चलते पैमाइश का कार्य भी पूरा नहीं हो पाया। पुलिस दोनों पक्षों को पकड़कर थाने ले गई। देर रात तक किसी भी पक्ष की ओर से मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया था।

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