AI से बदलेगी भारत की युद्ध तकनीक, देहरादून में डेवलप हो रहा एडवांस सिस्टम
युद्ध तकनीक में तेजी से बदलाव आ रहा है, जिसमें इंडिया आप्टेल लिमिटेड देहरादून में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मानवयुक्त-अमानवयुक्त टीमिंग विकसित कर रहा है।


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सुमन सेमवाल, देहरादून। युद्ध तकनीक तेजी से बदल रही है। अब टैंक के आगे बढ़ने से पहले छोटे मानवरहित ड्रोन आसमान से इलाके की निगरानी करेंगे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) संदिग्ध वस्तुओं व संभावित लक्ष्यों की पहचान में मदद करेगी।
इंडिया आप्टेल लिमिटेड के समूह की अनुसंधान परियोजनाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मानवयुक्त-अमानवयुक्त टीमिंग (तालमेल युक्त कार्य) इसी दिशा में विकसित की जा रही है। इस परियोजना को आइओएल आर्डनेंस फैक्ट्री चंडीगढ़ और आइआइटी रोपड़ के सहयोग से आगे बढ़ा रही।
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टैंक के आगे उड़कर देगा क्षेत्र की जानकारी
परियोजना में एक छोटे मानवरहित हवाई वाहन को टैंक के साथ काम करने के लिए विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दिन और रात में स्वायत्त उड़ान भरकर टैंक के आगे के क्षेत्र की निगरानी करना और वहां मौजूद महत्वपूर्ण वस्तुओं या संभावित लक्ष्यों की पहचान में सहायता करना है।
कैमरा ही नहीं, आंकड़ों का विश्लेषण भी करेगा एआई
सामान्य ड्रोन मुख्य रूप से कैमरे से तस्वीर या वीडियो भेजता है, जिसके आधार पर ऑपरेटर निर्णय लेता है। प्रस्तावित प्रणाली में ड्रोन के संवेदकों से मिलने वाले आंकड़ों का कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से विश्लेषण किया जाएगा। इसका उद्देश्य संदिग्ध वस्तु, वाहन या अन्य महत्वपूर्ण गतिविधि को पहचानने में सैनिकों की मदद करना है।
इस व्यवस्था में ड्रोन की स्वायत्त उड़ान, क्षेत्र की निगरानी, आंकड़ा संग्रह और एआई आधारित पहचान जैसी क्षमताएं एक साथ काम करेंगी। इससे टैंक दल को आगे के क्षेत्र की जानकारी प्राप्त करने के लिए स्वयं लगातार जोखिम उठाने की आवश्यकता कम हो सकती है।
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दिन-रात लक्ष्य पहचान पर भी शोध
इंडिया आप्टेल समूह की अनुसंधान परियोजनाओं में एआई आधारित हथियार दृष्टि प्रणाली का भी उल्लेख है। इसका लक्ष्य दिन और रात में छद्मावरण में छिपे लक्ष्य की पहचान और उसे ट्रैक करने में सहायता करना है। ताकि पारंपरिक प्रकाशीय उपकरणों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पहचान तकनीक को भी जोड़ा जा सके।
