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भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने ISI की साजिश का किया खुलासा, लश्कर-जैश को मिल रही हमास की सुरंग युद्ध तकनीक

Published: Thu, 13 Aug 2026 10:28 PM (IST)

पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था और ISI पर हमास व लश्कर-जैश जैसे आतंकी संगठनों के बीच रणनीतिक गठजोड़ को बढ़ावा देने का आरोप है।

ISI की साजिश का खुलासा (जागरण)

ISI की साजिश का खुलासा (जागरण)

HighLights

  1. ISI पर हमास-लश्कर-जैश गठजोड़ को बढ़ावा देने का आरोप।

  2. पाकिस्तानी आतंकी समूहों को हमास की सुरंग युद्ध तकनीक।

  3. PoJK में सुरंग नेटवर्क से भारत को गाजा जैसी चुनौती।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था और खुफिया एजेंसी आइएसआइ पर हमास और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद के बीच रणनीतिक गठजोड़ को बढ़ावा देने का आरोप लगा है।

भारतीय सुरक्षा अधिकारियों और हालिया सुरक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, इसके पीछे कथित मकसद पाकिस्तानी आतंकी संगठनों को हमास की सुरंगों के जरिए युद्ध लड़ने की तकनीक और दूसरे ऑपरेशनल तौर-तरीकों से लैस करना है।

उदयपुर स्थित सुरक्षा एवं विदेश नीति थिंक टैंक 'उनास फाउंडेशन' की रिपोर्ट 'हमास-पाकिस्तान नेक्सस: ए थ्रेट टू इंडिया एंड इजरायल' में दावा किया गया है कि पाकिस्तान में हमास की मौजूदगी दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, हमास को पाकिस्तान में सुरक्षित ठिकाने और आर्थिक मदद मिल सकती है, जबकि लश्कर और जैश को गुरिल्ला युद्ध और सुरंगों के जरिए लड़ाई के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने में हमास की विशेषज्ञता का लाभ मिल सकता है।

पीओजेके में सुरंग नेटवर्क की आशंका

रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि गुलाम जम्मू-कश्मीर में सुरंगों का बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया तो भारतीय सुरक्षा बलों के सामने गाजा जैसी चुनौती खड़ी हो सकती है। इन सुरंगों का इस्तेमाल लंबे समय तक गुरिल्ला लड़ाई और आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान का उद्देश्य लश्कर और जैश जैसे संगठनों की क्षमताओं को हमास के आपरेशनल माडल के करीब ले जाना हो सकता है।

रिपोर्ट में सुरंग युद्ध के अलावा हमास के ड्रोन और ग्लाइडर के इस्तेमाल की क्षमता को भी संभावित खतरे के तौर पर रेखांकित किया गया है। आशंका जताई गई है कि भविष्य में कश्मीर में आतंकी संगठन ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं।

गाजा-कश्मीर समानता के नैरेटिव पर भी नजर

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान का प्रोपेगैंडा तंत्र लंबे समय से गाजा और कश्मीर के बीच समानता दिखाने की कोशिश करता रहा है।

हाल के महीनों में पाकिस्तान में हुई कुछ हाई-प्रोफाइल बैठकों और रैलियों में हमास, लश्कर और जैश से जुड़े नेताओं या प्रतिनिधियों की मौजूदगी का भी दावा किया गया है। इन आयोजनों में गाजा और कश्मीर को एक ही संघर्ष के रूप में पेश करने पर जोर दिया गया।

रिपोर्ट में पाकिस्तान में हमास की गतिविधियों को कथित राजनीतिक समर्थन मिलने का भी उल्लेख है। इसमें पिछले साल दोहा में कतर स्थित पाकिस्तान के राजदूत लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद आमिर और हमास के वरिष्ठ अधिकारी बासेम नईम के बीच हुई मुलाकात का हवाला दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुलाकात में कश्मीर और गाजा के संघर्षों के बीच समानता पर जोर दिया गया था।

(समाचार एजेंसी आइएएनएस के इनपुट के साथ)

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