संवाद सहयोगी, गोपेश्‍वर। एक सप्ताह बाद जोशीमठ मलारी नीती हाईवे खुलने से सीमांत गांवों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। बीते 18 व 19 अक्टूबर को जनपद में भारी बारिश हुई। 19 अक्टूबर को बारिश के बाद जोशीमठ नीती मलारी हाईवे तपोवन, तमक, भापकुंड, रैंणी, सलधार सहित कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके अलावा कई स्थानों पर मलबा व बोल्डर भी सड़क पर आ गए थे।

जिससे नीती, मलारी, गमशाली, बाम्पा, फरकिया, द्रोणागिरी, कैलाशपुर, गुरगुटी सहित कई गांवों के एक हजार से अधिक ग्रामीण घरों में ही कैद होकर रह गए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी 22 अक्टूबर को गोपेश्वर पहुंचकर मलारी हाईवे को तत्काल खोलने व यहां फंसे ग्रामीणों को खाने, रहने की व्यवस्था करने के निर्देश प्रशासन को दिए थे। अब बीती रात को सीमा सड़क संगठन ने हाईवे को मलारी व नीती तक सुचारु कर दिया गया है। सीमा सड़क संगठन के कमांडर मनीष कपिल ने बताया कि हाईवे को पूरी तरह से सुचारु कर दिया गया है।

उत्तराखंड में रुक-रुक कर हो रही बारिश और भूस्खलन से सड़क मार्ग बार-बार बाधति हो रहे हैं। चीन सीमा से सटे नीति में भी अगस्त के महीने से ही बार-बार भूस्खलन हो रहा है, जिससे यहां आवाजाही को रोक दिया गया था। सड़क सीमा संगठन (बीआरओ) ने रविवार को बताया कि अब सड़क पर वाहनों की आवाजाही एक बार फिर शुरू कर दी गई है।

उन्होंने बताया कि बार-बार भूस्खलन के कारण सड़क खोलने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पैदल चलने वालों की आवाजाही भी अवरुद्ध हो गई थी। पहले जारी एक बयान में उन्होंने बताया था कि लोगों के लिए वैकल्पिक रास्ता बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की मदद ली जा रही है।

राष्ट्रीय राजमार्ग की करवाई जाए मरम्मत

वहीं, नजीबाबाद-कोटद्वार के मध्य बदहाल स्थिति में पहुंचे राष्ट्रीय राजमार्ग की मरम्मत के लिए क्षेत्रवासियों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजा। कहा कि बदहाल स्थिति में पहुंचे राष्ट्रीय राजमार्ग पर हर समय दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। ज्ञापन में तड़ियाल चौक निवासी रचित कुकरेती, मुकेश नेगी, राहुल कुमार ने कहा कि कुछ माह पूर्व उप्र सरकार की ओर से नजीबाबाद-कोटद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) का डामरीकरण करवाया गया था, लेकिन अब यह मार्ग दोबारा बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है।

एनएच पर आवाजाही करने वाले वाहन चालकों को गड्ढों में सड़क खोजनी पड़ती है। दिन-रात दौड़ रहे खनन के ओवरलोड डंपरों के कारण मार्ग पर हर समय दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। सबसे अधिक खतरा रात के समय आवाजाही करने वालों को होता है। कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग से आवाजाही करने वाले व्यक्तियों के हित को देखते हुए जल्द राष्ट्रीय राजमार्ग की मरम्मत करवाई जानी चाहिए।

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Edited By: Raksha Panthri