यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 19, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
IIP के बायोजेट फ्यूल को वायु सेना के लिए मंजूरी, इससे उड़ सकेंगे फाइटर जेट; 10 साल में विकसित हुई तकनीक
भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आइआइपी) को बड़ी सफलता मिली है। संस्थान की ओर से तैयार किए गए बायोजेट फ्यूल (बायोफ्यूल) को ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, देहरादून। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आइआइपी) को बड़ी सफलता मिली है। संस्थान की ओर से तैयार किए गए बायोजेट फ्यूल (बायोफ्यूल) को वायु सेना के फाइटर जेट के लिए मंजूरी प्रदान कर दी गई है। यह मंजूरी सेना उडऩ योग्यता एवं प्रमाणीकरण केंद्र की ओर से दी गई। यह प्रमाण पत्र संस्था के सीईओ की ओर से आइआइपी के निदेशक डा. अंजन रे को गुरुवार को सौंपा गया।
आइआइपी निदेशक ने बताया कि 27 अगस्त, 2018 को बायोजेट फ्यूल से देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट से स्पाइस जेट के एयरप्लेन ने दिल्ली के लिए सफल उड़ान भरी थी। तभी से संस्थान के कार्मिक ईंधन को लेकर उत्साहित थे और वायु सेना ने भी बायोजेट फ्यूल के प्रयोग को लेकर इच्छा जताई थी। सेना के प्रयोग को देखते हुए ईंधन को कई परीक्षण चरण से गुजारा गया और ट्रायल भी किए गए। इससे पहले वायु सेना बायोजेट फ्यूल का प्रयोग कर 26 जनवरी 2019 को राजपथ के ऊपर फाइट जेट से सफल उड़ान भर चुकी है और 30 जनवरी 2020 को एक रूसी विमान ने भी लेह हवाई अड्डे तक उड़ान भरी।
विशेषज्ञ संस्थानों ने किया परीक्षण
आइआइपी के बायोफ्यूल पर मुहर लगाने से पहले इंडियन आयल कार्पोरेशन, हिंदुस्तान एरोनाटिक्स लि. से इसका परीक्षण कराया गया। गहन परीक्षण के बाद सभी स्तर पर बायोजेट फ्यूल को मंजूरी दे दी गई।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए मंजूरी की तरफ कदम
अब आइआइपी ने बायोजेट फ्यूल का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए करने की दिशा में भी कदम बढ़ा दिए हैं। इसके लिए अमेरिकन सोसाइटी फार टेस्टिंग एंड मटीरियल से परीक्षण कराया जा रहा है। निदेशक डा. अंजन रे के मुताबिक परीक्षण का पहला चरण आइआइपी ने पार कर लिया है।
वायु सेना को 2100 लीटर से अधिक की आपूर्ति
अभी तक आइआइपी वायु सेना को 2100 लीटर से अधिक बायोजेट फ्यूल उपलब्ध करा चुका है। हालांकि, अभी संस्थान के प्लांट में रोजाना 20 लीटर बायोफ्यूल तैयार किया जा रहा है। इसके व्यावसायिक उत्पादन के लिए विभिन्न कंपनियों से बात की जा रही है। आइआइपी निदेशक के मुताबिक, रोजाना 10 हजार लीटर ईंधन तैयार करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय संस्थान की 50 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दे चुका है।
स्पाइजेट भी लगाएगी रिफाइनरी
निकट भविष्य में स्पाइसजेट ने अपने सभी विमानों में 25 फीसद बायोजेट फ्यूल के प्रयोग का लक्ष्य रखा है। आइआइपी के अनुसार, स्पाइजेट को प्रतिदिन करीब 10 हजार लीटर बायोजेट फ्यूल की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में यह विमानन कंपनी भी आइआइपी की मदद से अपनी रिफाइनरी स्थापित करने पर विचार कर रही है।
सामान्य ईंधन के करीब लाई जाएगी बायोजेट फ्यूल की लागत
आइआइपी के वैज्ञानिकों ने इस दिशा में भी काम करना शुरू कर दिया है कि बायोजेट फ्यूल की लागत को कम किया जा सके। अभी जो फ्यूल तैयार हो रहा है, उसकी कीमत करीब 120 रुपये प्रति लीटर आ रही है। जबकि सामान्य एविएशन फ्यूल की दर करीब 100 रुपये लीटर है। दर बढऩे के पीछे बड़ी वजह यह भी है कि छत्तीसगढ़ से जो बायोफ्यूल मंगाया जा रहा है, उसकी ही कीमत करीब 70 रुपये प्रति लीटर चुकानी पड़ रही है। इसके लिए वेस्ट कुकिंग आयल का प्रयोग करने पर भी विचार किया जा रहा है।
यह तेल 20 रुपये प्रति लीटर तक प्राप्त हो जाता है। प्रयास किए जा रहे हैं कि आयात करके भी ऐसा तेल मंगाया जाए। इसके लिए संस्थान के अधिकारी सरकार से मांग कर रहे हैं कि वेस्ट कुकिंग आयल पर आयात व अन्य शुल्क माफ किए जाएं। इस तरह निकट भविष्य में प्रयास किए जाएंगे कि बायोजेट फ्यूल की कीमत या तो सामान्य ईंधन से कम हो जाए या कम से कम उसके इर्द-गिर्द जरूर रहे।
10 साल में विकसित की तकनीक
आइआइपी ने बायोजेट फ्यूल तैयार करने की तकनीक पर वर्ष 2008-09 से काम शुरू किया था। करीब 10 साल के गहन शोध के बाद संस्थान के विज्ञानियों ने यह उपलब्धि हासिल कर ली। बायोजेट फ्यूल तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में संस्थान के विज्ञानी डा. सिन्हा बताते हैं कि बायोजेट फ्यूल तैयार करने के लिए सामान्य बायोफ्यूल (जैट्रोफा ईंधन) से उत्प्रेरक (कैटलिस्ट) के माध्यम से आक्सीजन को अलग किया गया।
इसके लिए मालीक्यूल्स का ब्रेकडाउन किया गया। साथ ही इसके हाइड्रोकार्बन की चेन को काटकर उसकी ब्रांचिंग की गई, क्योंकि आक्सीजन की मौजूदगी व हाइड्रोकार्बन की अधिकता के चलते ऐसा ईंधन कम तापमान में जमने लगता है, जबकि कैटलिस्ट प्रक्रिया के बाद तैयार बायोजेट फ्यूल माइनस 47 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान में भी सामान्य अवस्था में रहता है।
