हरिद्वार में मदरसों पर कार्रवाई का विरोध: प्रशासनिक टीम को लौटना पड़ा वापस, कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल
हरिद्वार में दो मदरसों पर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम, 2025 के तहत बिना अनुमति धार्मिक शिक्षा संचालित करने पर प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान भारी विरोध का सामना करना पड़ा।

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राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम, 2025 के तहत बिना अनुमति धार्मिक शिक्षा संचालित करने वाले दो मदरसों पर कार्रवाई के दौरान हरिद्वार में प्रशासनिक टीम को मुस्लिम समुदाय के कड़ा विरोध का सामना करना पड़ा।
लाढरदेवा और नन्हेड़ा मदरसों में बिना कार्रवाई के टीम बैरंग लौटा दी गई। यह कानून-व्यवस्था को ठेंगा और मुख्यमंत्री धामी के आधुनिक विजन पर सीधा हमला है।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के चेयरमैन सुरजीत सिंह गांधी ने गुरुवार को बयान जारी कर बताया कि बुधवार देर शाम को लाढरदेवा, इकबालपुर स्थित दरुस सलाम मदरसे में प्रशासनिक टीम ने संस्थान के उन दो कमरों को सील किया, जहां कथित तौर पर आवश्यक अनुमति के बिना धार्मिक शिक्षा संचालित की जा रही थी।
वहीं, नन्हेड़ा स्थित दारुल उलूम सिद्दीकी मदरसे में कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और नारेबाजी करने लगे। प्रो.गांधी ने बताया कि उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम, 2025 के तहत मदरसों को मुख्य धारा की शिक्षा के लिए शिक्षा विभाग और धार्मिक शिक्षा के लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेना अनिवार्य है।
इन दोनों मदरसों के पास शिक्षा विभाग से तो मान्यता है, लेकिन प्राधिकरण की अनुमति के बिना धार्मिक शिक्षा संचालित की जा रही थी। जिसे प्रशासन ने अवैध ठहराया है। ऐसे मदरसा संचालकों पर पांच लाख रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है।
मुख्यमंत्री के आधुनिक शिक्षा विजन का दिया हवाला
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के चेयरमैन प्रो. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि इस तरह का विरोध मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस विजन पर हमला है, जिसमें अल्पसंख्यक समाज के बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मदरसों के विद्यार्थियों को धार्मिक शिक्षा के साथ विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) जैसी आधुनिक विधाओं का ज्ञान मिलना चाहिए, ताकि वे मुख्यधारा से जुड़कर देश के विकास में योगदान दे सकें।
उन्होंंने बताया कि पूरे प्रकरण में जिला समाज कल्याण अधिकारी हरिद्वार चंद्र प्रकाश सिंह रावत की रिपोर्ट के आधार पर कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने और विरोध की परिस्थितियों की जांच की सिफारिश की जाएगी।
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