राज्य ब्यूरो, देहरादून

राज्य की नदियों के साथ ही नहरों से भी बिजली उत्पादन किया जाएगा। फ्लोटिंग टरबाइन के जरिये यह मुमकिन होगा। इस योजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश जलविद्युत निगम को दिए गए हैं। निगम जल्द ही योजना के बारे में मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुतीकरण देगा। पौड़ी जिले में चीला में इसकी पहली परियोजना स्थापित की जाएगी।

प्रदेश में बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं की राह पर्यावरणीय बंदिशों की वजह से तकरीबन बंद है। बड़ी परियोजनाओं के बूते ऊर्जा प्रदेश के ख्वाब को झटका लगने के बाद उत्तराखंड अब ऊर्जा उत्पादन के वैकल्पिक उपायों पर जोर दे रहा है। सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर सरकार तेजी से कदम आगे बढ़ा रही है। इसके साथ ही फ्लोटिंग टरबाइन के माध्यम से छोटी नदियों और नहरों से भी बिजली उत्पादन करने पर मंथन शुरू हो चुका है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस संबंध में संबंधित महकमों को निर्देश दिए थे। दरअसल पर्वतीय क्षेत्रों में बिजली की सुचारू आपूर्ति एक चुनौती है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों और कारोबार को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। बिजली की ज्यादा आवश्यकता देखते हुए फ्लोटिंग टरबाइन योजना को अमल में लाने की तैयारी है। स्थानीय स्तर पर इससे बिजली मिलेगी, साथ ही खेतों की सिंचाई तथा पेयजल आपूíत में मदद मिलेगी।

ऊर्जा सचिव राधिका झा ने कहा कि इस योजना का विस्तृत खाका खींचने का जिम्मा उत्तराखंड जलविद्युत निगम को दिया गया है। नदियों व नहरों की क्षमता के उपयोग लागत का आकलन भी किया जा रहा है। निगम विशेषज्ञ संस्थाओं के माध्यम से इस योजना को लेकर तीन से चार प्रस्तुतीकरण देगा। मुख्यमंत्री के सामने भी यह प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि योजना परवान चढ़ने पर सिंचाई के लिए वर्षा जल पर पर्वतीय खेती की निर्भरता कम होगी। इस योजना में स्थानीय लोगों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। पर्यटन के लिए भी इस योजना का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

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