ऐसे ही नहीं पड़ा ईडी का छापा, 46 साल से हरदा का हमसाया हैं चंदन सिंह जीना
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के देहरादून स्थित घर पर ग्राम ...और पढ़ें
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राज्य ब्यूरो, जागरण देहरादून। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना (वर्तमान में वैयक्तिक सहायक) चर्चा के केंद्र में है। पिछले 46 साल से हरदा से जुड़े जीना के घर से बरामद 32 लाख की नकदी, सोना और अन्य मूल्यवान वस्तुएं कहां से आईं, यह सवाल हर किसी के मन में कौंध रहा है।
वह भी तब जबकि, जीना सामान्य परिवार से आते हैं। यद्यपि, कहा जा रहा है कि बरामद धनराशि लोगों ने चंदे के तौर पर पार्टी के लिए दी थी, लेकिन बड़ा प्रश्न है कि यह राशि देने वाले लोग कौन हैं। अब ईडी इस बिंदु को भी खंगाल रही है, जिससे तस्वीर साफ होगी।
मूल रूप से अल्मोड़ा निवासी जीना का नाम ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती घपले में आने के आलोक में ईडी ने उनके देहरादून में तपोवन स्थित घर पर छापे की कार्रवाई की थी। यह घर उनका अपना है। जीना, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ तब से जुड़े हैं, जब वर्ष 1980 में रावत ने लोकसभा चुनाव जीता था।
इसके बाद से वह उनके वैयक्तिक सहायक की भूमिका निभाते आ रहे हैं। दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियों से लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी उनकी सक्रियता रही है। जब रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने तो उस अवधि में जीना ने उनके ओएसडी की जिम्मेदारी निभाई।
बताया गया कि बतौर ओएसडी तीन साल के कार्यकाल में उन्हें डेढ़ से दो लाख रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था। वैयक्तिक सहायक के रूप में उन्हें रावत से प्रतिमाह कितना मेहनताना मिलता है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई। यही नहीं, उनका कोई उद्योग अथवा व्यापार भी नहीं है। ऐसे में उनके घर से बरामद नकदी व कीमती सामान को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
